जरा संभलकर करें इंटरनेट का इस्तेमाल, 90 प्रतिशत मामलों में महिलाएं हो रही शिकार, बच्चे कर रहे आत्महत्या

जरा संभलकर करें इंटरनेट का इस्तेमाल, 90 प्रतिशत मामलों में महिलाएं हो रही शिकार, बच्चे कर रहे आत्महत्या

Reena Sharma | Updated: 02 Aug 2019, 12:30:25 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

कैचवर्ड : स्कूलों में जागरूकता पर पुलिस का ज्यादा जोर, 46 प्रतिशत मामलों में बच्चों को आता है आत्महत्या का विचार

इंदौर. इंटरनेट का इस्तेमाल कई बार परेशानी का भी कारण बन रहा है। पुलिस के पास आने वाली शिकायतों में ऑनलाइन फ्रॉड की ज्यादा होती हैं। ऑनलाइन प्रताडऩा के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत में महिलाएं शिकार होती हैं। ऑनलाइन प्रताडऩा में बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है।

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हाल ही में पुलिस ने शिकायतों की समीक्षा की तो यह तथ्य सामने आया। एएसपी शैलेंद्रसिंह चौहान के मुताबिक, हर वर्ग के लोग ऑनलाइन ठगी के शिकार होते हैं। पुलिस ने महिला व बच्चों को लेकर छानबीन की तो यह हैरत में डालने वाला तथ्य सामने आया। शिकायतों की समीक्षा में पता चला, महिलाएं अपनी सुविधा व सहूलियत के लिए इंटरनेट इस्तेमाल करती हैं, लेकिन जाने-अनजाने कब प्रताडि़तों की सूची में शामिल हो जाती हैं उन्हें समझ ही नहीं आता। ठगी तो कम, उन्हें हरेस ज्यादा किया जाता है।

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यह उनकी छवि खराब करने से लेकर ब्लैकमेल तक होता है। एएसपी के मुताबिक, सभी शिकायतों की जांच में पता चला कि ऑनलाइन प्रताडऩा (हरेसमेंट) की शिकायतों में पुरुषों की संख्या मात्र 10 प्रतिशत, महिलाएं-युवतियों की 90 प्रतिशत है। इससे साफ होता है, इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली लगभग सभी महिलाएं कभी न कभी प्रताडऩा का शिकार होती हैं। इसी तथ्य के आधार पर उन्हें सचेत किया जा रहा है।

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56 प्रतिशत बच्चे, 24 घंटे ऑनलाइन

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बच्चों को लेकर छानबीन करने पर पता चला, कई ऐप के चक्कर में वे ऐसे फंस जाते हैं कि पालकों को भी बता नहीं पाते। ऑनलाइन ऐप, खासकर गेम ऐप बच्चों को सबसे ज्यादा परेशान कर रहे हैं। कई बार बच्चा डिप्रेशन में चला जाता है। माता-पिता को परेशानी पता चलती है तो पुलिस अथवा काउंसलर की मदद लेते हैं। पालकों की शिकायत से सामने आया कि करीब 56 प्रतिशत मामलों में बच्चे 24 घंटे ऑनलाइन रहते हैं, जो बहुत घातक है। काउंसलर ने बात की तो पता चला, 47 प्रतिशत मामलों में बच्चे आत्महत्या की सोचने लगते हैं। एएसपी का कहना है, जागरूकता अभियान के तहत पालकों को भी यह तथ्य बताकर पुलिस सजग कर रही है।

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शिकायतों के आधार पर प्रतिशत

-ऑनलाइन हरेसमेंट की शिकायतों में 90 प्रतिशत पीडि़त महिलाएं होती हैं।
-10 प्रतिशत पीडि़त पुरुष है।
-बच्चों के विरुद्ध लैंगिक अपराध का 82 प्रतिशत है।
-बच्चों के ऑनलाइन रहने का प्रतिशत 56 है।
-47 प्रतिशत मामलों में बच्चों के मन में आत्महत्या का विचार आया है।
-महिलाओं के मामले में हरेसमेंट के 12 प्रतिशत मामले फेसबुक तो 88 प्रतिशत वॉट्सऐप पर होते हैं।

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जागरूकता अभियान चला रहे

ऑनलाइन प्रताडऩा व शिकायतों के मामलों में महिला व बच्चे ज्यादा प्रभावित रहते हैं। इसलिए स्कूल-कॉलेजों में छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है, किस तरह इस तरह की प्रताडऩा से बचने के लिए सजग रहें। पुलिस इस तरह के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

-रुचिवर्धन मिश्र, एसएसपी

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