फुटपाथ से फ्लैट तक ले गई 'प्रतिभा'

सड़क किनारे रहकर दसवीं में अव्वल आने वाली छात्रा को मिला आवास, घर देखकर खुशी से फूला नहीं समा रहा परिवार, कई कठिन परिस्थितियों का सामना कर बच्ची ने पाई सफलता

By: Uttam Rathore

Updated: 09 Jul 2020, 11:35 AM IST

इंदौर. उत्तम राठौर

व्यक्ति में अगर प्रतिभा हो तो उसे फर्श से अर्श तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही वाकया शहर में देखने को मिला है। खुले आसमां के नीचे फुटपाथ पर सोता था परिवार, घर की छत सपने में ही देखी थी। छात्रा का सपना इतनी जल्दी सच होगा, यह सोचा नहीं था। छात्रा ने जब पहली बार घर की छत देखी, तो उसकी और परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। होनहार बच्ची की इस प्रतिभा को निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने पहचाना और वह जीवन में आगे बढ़े, इसलिए तुरत-फुरत फ्लैट आवंटित कर दिया।

हम बात कर रहे हैं उस होनहार छात्रा भारती खांडेकर की, जिसने फुटपाथ पर रहते पढ़ाई की और 10 वीं में 69 प्रतिशत अंक लाकर माता-पिता के साथ अहिल्या आश्रम स्कूल का नाम रोशन किया। निगम मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर शिवाजी मार्केट के पास फुटपाथ पर रहने वाली भारती पढ़ाई के बल पर भूरी टेकरी स्थित बहुमंजिला इमारत के फ्लैट नंबर 307 में पहुंच गई, लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी संघर्ष जारी है। यह सी-ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर फ्लैट मिलने से पानी भरने और खाना बनाने के लिए गैस न होने को लेकर है। भारती सहित परिवार चूल्हे पर खाना बना रहा है। फ्लैट मिलने के बाद आज सुबह पत्रिका समूह के न्यूज टुडे की टीम भारती के पास पहुंची और उसकी कठनाई और सफलता के बारे में जाना।

फुटपाथ से फ्लैट तक ले गई 'प्रतिभा'

भारती कहानी, उसी की जुबानी
फुटपाथ से फ्लैट में पहुंची भारती का कहना है कि मैं सभी को धन्यवाद देना चाहती हंू। सबसे पहले मम्मी-पापा को, जिन्होंने मेहनत करके मुझे पढ़ाया और इस काबिल बनाया। पहली बार छत को देखा है। पहली बार घर में रहने का मौका मिला है। नगर निगम के सभी अफसरों को मेरा धन्यवाद, जिन्होंने हमें घर दिया। निगम कमिश्नर मैडम प्रतिभा पाल को धन्यवाद, जिन्होंने घर देने के लिए मदद की। अपनी सफलता का श्रेय मैं अपने मम्मी-पापा, स्कूल टीचर और मुझसे जुड़े सभी करीबियों को देना चाहूंगी, जिन्होंने मुझे सपोर्ट किया। मदद की। फुटपाथ पर रहने के दौरान पढ़ाई करते वक्त मुझे बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, क्योंकि बरसते पानी में पढ़ाई करती थी तो कॉपी-किताब गीली हो जाती। बैग में पानी घुस जाता तो आधे से ज्यादा सामान ऐसे ही बेकार हो जाता और दोबारा लाने की हैसियत नहीं थी। पैसा नहीं होने पर सामान लाने में दिक्कत होती थी, तो थोड़े बहुत बचे सामान से ही व्यवस्था कर पढ़ाई पूरी करती थी। घर मिलने पर बहुत खुशी हो रही है, क्योंकि अब पहले जैसी दिक्कत नहीं आएगी। बड़ी होकर आईएएस अफसर बनना चाहती हूं ताकि आज जैसे मेरी सबने हेल्प की, वैसे ही मैं सबकी मदद करूं।

राशन कार्ड बनते ही मिलेगी गैस
भारती का कहना है कि अभी गैस की व्यवस्था नहीं है, इसलिए चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। इस बारे में निगम कमिश्नर मैडम से बात की है। उन्होंने कहा कि पहले राशन कार्ड बनवा लो, इसके बाद गैस कनेक्शन भी दिला देंगे।

फुटपाथ से फ्लैट तक ले गई 'प्रतिभा'

बेटी की मेहनत का मिला फल
भारती के पिता दशरथ खांडेकर का कहना है कि बेटी ने बड़ी मेहनत से पढ़ाई की है। मजदूरी करके मुसीबत से पढ़ाया है। फुटपाथ पर रहने के दौरान परेशानी बहुत आती थी। खासकर बरसात के दिनों में, क्योंकि जहां हम रहते थे, वहां जीव-जंतु सब निकलते थे, जिन्हें भगाने में ही रात निकल जाती थी। पानी में बिस्तर और रोटी गीली हो जाती थी। बड़ी मुसीबत उठाई। हम समस्या लेकर जिम्मेदारों के पास जाते तो कोई मदद नहीं मिलती थी। बेटी पढ़ाई कर अच्छे नंबर लाई तो मीडिया वाले आए और फिर हमारी मदद हुई। मकान मिलने से खुशी है। बच्ची अब अच्छी पढ़ाई करके आगे बढ़ेगी।

फुटपाथ से फ्लैट तक ले गई 'प्रतिभा'

निगम ने टेबल-कुर्सी, पंखा और दिलाए कपड़े
निगमायुक्त प्रतिभा पाल के आदेश पर छात्रा भारती को जहां भूरी टेकरी पर फ्लैट दिया गया है, वहीं निगम की तरफ से उसे टेबल-कुर्सी, पंखा और कपड़े दिलाए गए हैं। इसके साथ ही अन्य कोई परेशानी होने पर बताने का अफसरों ने कहा है। इधर, निगमायुक्त ने छात्रा भारती की पढ़ाई मुफ्त में कराने की जिम्मेदारी ली है। निगमायुक्त ने बोला है कि फीस को लेकर में प्रॉब्लम आए तो उन्हें अवगत कराए। इसके साथ ही उन्होंने भारती को अपने भाइयों को भी आगे पढ़ाने का कहा है, जो कि सबनीस बाग सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। निगमायुक्त पाल के आदेश पर भूरी टेकरी पर भारती को फ्लैट आवंटन की प्रकिया जल्द से जल्द पूरी करने को प्रधानमंत्री आवास योजना के अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा दिया।

फ्लैट की कीमत इकट्ठा करेंगे जनता से
भूरी टेकरी पर निगम ने जो फ्लैट भारती को दिया है, उसकी कीमत 1 लाख 20 हजार रुपए है। फुटपाथ पर रहने वाली भारती इतनी कीमत नहीं चुका सकती। इसके लिए राशि जनता के सहयोग से इकट्ठा की जाएगी।

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Uttam Rathore Reporting
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