MP में फिलहाल नहीं बढ़ रहा जल और स्वच्छता पर टैक्स, नगरीय निकाय के चलते पीछे हटी सरकार

1 अप्रैल से इंदौर समेत प्रदेशभर में अलग अलग शहरों और इलाकों के अनुसार करों में वृद्धि करने का फैसला लिया था, जिसे सरकार ने स्थगित कर दिया गया है।

By: Faiz

Published: 01 Apr 2021, 10:24 PM IST

इंदौर/ मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों के चलते किसी भी तरह के करों में बढ़ोतरी नहीं होगी। सरकार द्वारा 1 अप्रैल से प्रदेशभर में अलग अलग शहरों और इलाकों के अनुसार करों में वृद्धि करने का फैसला लिया था, जिसे सरकार ने स्थगित कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद इंदौर, भोपाल समेत प्रदेश के सभी बड़े शहरों में की गई टैक्स की बढ़ोतरी दरें वापस की जाएंगी। प्रदेश के सभी जिला प्रशासनों द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। सबसे अधिक लाभ इंदौरवासियों को हुआ है, बता दें कि, यहां करों में वृद्धि दर किये जाने के बाद बीती करों से तीन गुना बढ़ोतरी हो रही थी, जिससे फिलहाल शहरवासियों को राहत मिली है।

 

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नगरीय चुनाव के चलते लिया गया फैसला

सरकार के इस आदेश के बाद अब शहरी इलाकों में लगने वाले जल कर समेत अन्य टैक्स वापस किये जाएंगे। यही नहीं सरकार द्वारा जारी आदेश में सभी निकायों को कर वृद्धि दरों को स्थगित करें। सरकार के इस फैसले के बाद शहरी इलाकों में निकाय द्वारा दी जाने वाली किसी भी सेवा के कर में बढ़ोतरी नहीं होगी। बता दें कि, सरकार द्वारा ये फैसला नगरीय निकाय चुनाव के चलते लिया है, क्योंकि इंदौर समेत कुछ बड़े शहरों में कर बढ़ोतरी होने के बाद आमजन पर काफी भार बढ़ गया था। इंदौर में तो जगह जगह इसके खिलाफ प्रदर्शन भी होने लगे थे। यही वजह है कि, सरकार शहरी इलाकों में टैक्स बढ़ोतरी करने के फैसले को स्थगित करना पड़ा है।


इंदौर में बवाल के हालात

इंदौर में वॉटर टैक्स, स्वच्छता समेत अन्य करों में इतनी बढ़ोतरी की गई थी कि, जिससे भारी भरकम टैक्स हो जाने के चलते शहर के आमजन में नाराजगी दिखाई देने लगी थी। लोगों की इसी नाराजगी को शांत करते हुए सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों के फैसले को स्थगित करते हुए आदेश जारी किया है। ये स्थगन आदेश नगर पालिका अधिनियम की शक्तियों के आधार पर किया गया है, जिसके चलते कहा गया है कि, वॉटर टैक्स और स्वच्छता पर उपभोक्ता से लिए जाने वाले टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

 

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यहां आमजन पर पड़ता सालाना 10 हजार का भार

बता दें कि, इंदौर नगर निगम द्वारा जिस हिसाब से करों में बढ़ोतरी की थी, उससे आम जन की जेब पर औसतन 10 हजार रुपए सालाना का भार पड़ने वाला था। आमजन की जेब पर पड़ने वाले इस भार के बाद शहर में निकाय के फैसले का जमकर विरोध शुरु हो गया। इसके बाद स्थानीय निकाय द्वारा जलकर, कचरा संग्रहण शुल्क और सीवरेज टैक्स में बढ़ोतरी के आदेश को स्थगित कर दिया। इसके अलावा दूसरे कई निकायों में भी इस तरह से टैक्स वृद्धि की खबरें आई थीं, जिसपर राज्य सरकार ने सभी शहरी इलाकों के निकायों में पुरानी दर पर टैक्स वसूली करने को ही यथावत रखने का आदेश दिया है।

 

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