प्रदेश के बजट से शहर को कई उम्मीदें

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करें, शुरू हो कौशल विकास विवि

 

इंदौर. केंद्रीय बजट से खाली हाथ रहे शहर को इस बार प्रदेश के बजट से बड़ी उम्मीदें है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का कार्य तो चल ही रहे हैं। नीतिगत संस्थानों की स्थापना और महंगाई से हो रही परेशानी दूर करने को ले कर भी शहर को बड़ी आशाएं हैं। शहर के लोग चाहते हैं, पेट्रोल-डीजल पर राज्य कर का हिस्सा कम हो, जिससे आवागमन खर्च में कमी आए, रोजमर्रा की महंगी हो रही वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण हो सकें। शिक्षा के क्षेत्र में हब बन चुके शहर को एक कौशल विकास विवि की जरूरत हैं। जिससे रोजगार की समस्या हल हो।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ इंदौर में हैं। आगामी १६ मार्च को प्रदेश का बजट पेश किया जाएगा। उनके प्रवास के मौके पर जब शहर के गणमान्य विशेषज्ञों से चर्चा की तो यह बातें सामने आई। अर्थशास्त्री जयंतीलाल भंडारी के अनुसार प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए जरूरी है, सरकार लोगों को बाजार में खरीदी के लिए मजबूर करें। इसके लिए जरूरी हैं, महंगाई से जूझ रही जनता के लिए कुछ राहत भरी घोषणाएं की जाए। इस समय कारोबारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कामर्स के सुशील सुरेका का कहना हैं, इस बजट में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आगामी निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाखा तैयार करना हैं। कोशिश की जाए, स्थानीय टैक्सेस में कमी करें। वर्तमान में मनोरंजन और पेट्रोल डीजल अधिक टैक्स का शिकार है। इसमें कमी की जानी चाहिए।
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के गौतम कोठारी का कहना हैं, सरकार ने भले ही छोटे-बड़े उद्योगों के लिए दो विभाग बना दिए, लेकिन नीतिगत फैसले लंबित हैं। जीएसटी के भुगतानों में हो रही देरी से परेशान भी। इसकी बजट में व्यवस्था हो। 

शहर के लोगों, कारोबारियों को यह उम्मीद
उद्योगों को १६०० करोड़ रुपए सरकार से लेना हैं। बजट में राशि का पर्याप्त प्रावधान किया जाए।
इंदौर देश के केंद्र में हैं। यहां से पूरे देश में सप्लाय की अच्छी संभावनाएं हैं। संसाधन भी पर्याप्त हैं, इनको अन्य शहरों तक पहुंचाने के लिए शहर को वेयरहाउस हब बनाया जा सकता हैं। इसके लिए एक बड़ा वेयर हाउस सेंटर बनें, जहां से वस्तुओं के सप्लाय और रखने की आधुनिक व्यवस्था हो।
मंडी टैक्स को युक्तियुक्त बनाए, जिससे अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल नहीं जाए।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में शहर को सरकारी हास्पिटल की जरूरत हैं। कुछ प्रोजेक्ट भी मंजूर हैं, बजट में प्रावधान नहीं होने से आकार नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा सेटेलाइट हास्पिटल्स खोले जाएं।
रीयल इस्टेट में सरकार राहत दिलाने के लिए कुछ योजना लाए, जिससे कारोबार में चाल आए।
शिक्षा के लिए बजट तो रखा जाता हैं। इसका उपयोग आम जनता के बच्चों की शिक्षा के लिए हो सके । इस सोच के साथ सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार लाया जाए।

jay dwivedi
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