छोटी-छोटी बातों पर लडक़र अलग हुए दंपती, कुटुंब न्यायालय के जजों ने ऐसे किया एक

छोटी-छोटी बातों पर लडक़र अलग हुए दंपती, कुटुंब न्यायालय के जजों ने ऐसे किया एक

Reena Sharma | Updated: 14 Jul 2019, 11:44:35 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

नेशनल लोक अदालत : जस्टिस जब कुर्सी छोडक़र बाहर आए तो 16 साल पुराने विवाद का कराया समझौता

इंदौर. हाई कोर्ट में नेशनल लोक अदालत के तहत शनिवार को 6 खंडपीठ में 290 प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण हुआ। इसमें एक करोड़ 62 लाख 31 हजार रुपए से अधिक के अवॉर्ड पारित किए गए। लोक अदालत के दौरान जस्टिस वीरेंद्रसिंह की कोर्ट में पैसों के लेन-देन से जुड़ा करीब 16 साल पुराना केस आया। इसमें एक पक्षकार विकलांग थे। उनके पैर में परेशानी थी। जस्टिस सिंह को इसकी जानकारी लगी तो वे कुर्सी से उठकर कोर्ट रूम से बाहर आए और वहीं खड़े होकर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया।

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सैलाना में रहने वाले गोपाल कुमावत और अली सफदर के बीच जमीन के पैसों को लेकर विवाद था। जस्टिस की समझाइश के बाद दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद केस खत्म हो गया। लोक अदालत में हाई कोर्ट में 1136 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 290 का निराकरण हो गया।

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टूटे घरों को जोडऩे जजों ने दिए पौधे, बोले-आबाद रहो

छोटी-छोटी बातों पर लडक़र अलग रह रहे 15 जोड़ों ने शनिवार को फिर साथ रहने की कसम खाई है। नेशनल लोक अदालत के तहत कुटुंब न्यायालय के जजों ने शनिवार को अनूठी पहल की। तलाक की दहलीज पर खड़े ऐसे जोड़ों को साथ रहने का महत्व बताया और जब वे मान गए तो उपहार स्वरूप पौधे और सदा आबाद रहने का आशीर्वाद दिया।

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जजों का कहना था, यह पौधे जोड़ों को सदा साथ रहने की याद दिलाएंगे और पर्यावरण की भी रक्षा होगी। एडवोकेट जितेंद्रसिंह ठाकुर के मुताबिक लहिया कॉलोनी की सुनीता और विकास नगर के मनीष की मई 2009 में शादी हुई थी। इनके दो बच्चे हैं।

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मामूली विवाद के चलते दोनों एक साल से अलग रह रहे थे। सुनीता ने भरण-पोषण का केस भी लगाया था। न्यायाधीश सुरभि मिश्रा की समझाश पर बच्चों के भविष्य के लिए दोनों फिर साथ हो गए। संजय अवचरे और दीपिका अवचरे भी करीब तीन साल से अलग रह रहे थे। कोर्ट की समझाइश पर फिर एक हुए। एडवोकेट प्रमोद जोशी और अचला जोशी ने बताया, 77 वर्षीय राधाबाई ने बेटे राजकुमार पर भरण-पोषण का केस लगाया था। कोर्ट की समझाइश पर बेटा मां का ख्याल रखने राजी हो गया।

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