प्रदेश की पहली कालोनी जो वैध थी और अब अवैध घोषित कर दी

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद फिर अवैध घोषित किया तुलसी नगर

इंदौर. २७ साल पहले बसाई गई वैध कॉलोनी तुलसी नगर को निगम ने आठ महीने पहले अचानक अवैध घोषित कर दिया। इससे कॉलोनी को मिलने वाली निगम की सुविधाएं बंद हो गईं, जबकि रहवासी बिजली बिल से लेकर जल कर और प्रॉपर्टी टैक्स बराबर जमा कर करते हैं। यह प्रदेश की एेसी पहली कॉलोनी है, जो वैध होने के बाद अवैध कर दी गई। इंदौर में आने वाले दर्जनों अफसर और इंदौर के बाहर नौकरी कर रहे दर्जनों अफसरों के मकान व प्लॉट है। बड़ी बात तो यह है कि इस कालोनी में प्लॉट काटने के लिए कई नालों को भर दिया और प्लॉट बेच दिए गए।
अवैध घोषित होने के बाद रहवासियों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पार्षद से लेकर विधायक महेंद्र हार्डिया और कमिश्नर संजय दुबे तक से शिकायत की है। विधायक हार्डिया ने इस मसले को विधानसभा में उठाया तो मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि कॉलोनी वैध है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नगर निगम के अफसर कॉलोनी के लोगों को सभी विभागों से एनओसी लेने की बात कह रहे हैं। अवैध घोषित करने के पीछे भी निगम ने तर्क दिया है कि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी को वैध कराने के लिए झूठ बोला।

कॉलोनी एक नजर में
१९९१-९२ में स्थापना
२७०० प्लॉट
७०० मकान
९००-१००० परिवार
५००० आबादी

ये समस्याएं हैं
टूटी सडक़ें, गंदे पार्क, बिजली की कमी, साफ-सफाई और गंदा नाला

 

-कॉलोनी से लगे नाले की सफाई नहीं हो रही है। सडक़ खराब हो गई। पार्षद संजय कटारिया से कई बार कहा, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। - संजय यादव, रहवासी

कॉलोनी को अचानक अवैध कर दिया। हर सुविधा हमें खुद जुटाना पड़ रही है। कॉलोनी में झाड़ू तक नहीं लगती है। आखिर हमें आश्वासन ही मिलते रहेंगे या कोई ठोस कार्रवाई भी होगी।
- राजेश कुमार तोमर,
अध्यक्ष रहवासी संघ

अफसर मुख्यमंत्री के आदेश का मखौल उड़ा रहे हैं। अवैध घोषित करके सुविधाएं बंद कर दी गईं। हमसे सभी विभागों की एनओसी मांगी जा रही है।

- बहादुर सिंह, सचिव रहवासी संघ

जब कॉलोनाइजर ने तुलसी नगर बसाने का अप्रूवल लिया था या एनओसी हासिल की थी, तब अफसर कहां गए थे। यहां पर समाज के नौकरीपेशा, बिजनेस मैन और अन्य तबके के लोग रहते हैं। हर कोई परेशान है।
- सुनील पांडेय, रहवासी

अर्जुन रिछारिया Incharge
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