मंत्री बोले- आखिरी बार समझा रहा हूं, अब गलती हुई तो शहर से बाहर भेज दूंगा, जानें क्या है मामला

मंत्री बोले- आखिरी बार समझा रहा हूं, अब गलती हुई तो शहर से बाहर भेज दूंगा, जानें क्या है मामला

Reena Sharma | Updated: 15 Jul 2019, 03:04:24 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

स्वास्थ्य मंत्री की डॉक्टरों को दो टूक : ‘पत्रिका’ ने उठाया था स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही का मामला

इंदौर. मल्हारगंज में लापरवाही से नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद ‘पत्रिका’ ने स्वास्थ्य विभाग में फैली अव्यवस्था की बीमारी प्रमुखता से उजागर की। इसके बाद रविवार को स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट हरकत में आए और डॉक्टरों की जमकर लू उतारी। उन्होंने साफ कहा, आखिरी बार समझा रहा हूं, अब ऐसी कोई गलती की तो इंदौर से बाहर भेज दिए जाओगे। यहां आने के लिए डॉक्टरों की लंबी कतार लगी हुई है।

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रविवार सुबह 8 बजे सिलावट ने रेसिडेंसी कोठी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई। जेडी डॉ. लक्ष्मी बघेल, सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जडिय़ा, सिविल सर्जन डॉ. एमपी शर्मा सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में सिलावट ने मल्हारगंज अस्पताल में हुई घटना और स्टाफ के रवैये को लेकर अधिकारियों को फटकारा। संस्था प्रभारी डॉ. अशोक मालू और ड्यूटी डॉक्टर वंदना केसरी के खिलाफ जांच जल्द पूरी कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

 

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सिलावट ने सीएमएचओ से कहा, नए डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है, तब तक उपलब्ध डॉक्टरों से पूरा काम लिया जाए। नए सिरे से रोस्टर बनाकर ड्यूटी तय करें और जो ड्यूटी नहीं कर रहे उनकी निगरानी कर मुझे रिपोर्ट दें। मैं तुरंत कार्रवाई करुंगा। उन्होंने कहा, जिनकी यहां काम करने की इच्छा नहीं है, वह मुझे बता दें। उन्हें तुरंत इंदौर से बाहर भेज दूंगा। यहां आने के लिए बड़ी संख्या में डॉक्टर्स के आवेदन मेरे पास पड़े हैं। सिलवट ने शुक्रवार को बंसल अस्पताल में लापरवाही के बाद नवजात की मौत के मामले में भी सोमवार को बयान लेकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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बीते बुधवार को इस नवजात की इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई थी। जननी सुरक्षा के तमाम दावों के उलट मल्हारगंज पॉलीक्लीनिक (लाल अस्पताल) में डॉक्टर ही नहीं थे तो नर्स ने डिलीवरी कराई। बच्चा रो नहीं रहा था तो इलाज करने के बाद उसे एमवाय अस्पताल रैफर किया गया। जननी एक्सप्रेस बुलाना तक उचित नहीं समझा। एमवायएच ले जाने के दौरान ही ऑक्सीजन नहीं मिल पाने से बच्चे ने दम तोड़ दिया था। मृत बेटे को गोद में लेकर परिजन इधर से उधर भटकते रहे। इस मामले को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था।

 

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