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मातृभूमि बचाने सीमा पर लड़े शौर्य चक्र प्राप्त फौजी.... अब नहीं जा पा रहे अपनी ही जमीन पर

शौर्य चक्र से सम्मानित सैनिक लगा रहा न्याय की गुहार, ट्रेन में डकैतों से हुई थी मुठभेड़, गोली लगने से हुए थे गंभीर घायल

इंदौर

Updated: March 04, 2022 11:36:02 am

मोहित पांचाल
इंदौर। नौकरी में रहते हुए एक फौजी ने मुस्तैद रहकर सीमाओं की रक्षा की। ड्यूटी पर जा रहे थे कि ट्रेन को डकैतों ने घेर दिया। वे बहादुरी से लड़े। मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी, जिस पर राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्य चक्र से स्मानित किया। आज वही फौजी अपनी जमीन पर जाने के लिए संघर्ष कर रहा है। कुछ लोगों ने रास्ते की सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है।
मातृभूमि बचाने सीमा पर लड़े, नहीं जा पा रहे अपनी जमीन पर
मातृभूमि बचाने सीमा पर लड़े, नहीं जा पा रहे अपनी जमीन पर
ये मामला शौर्य चक्र प्राप्त सेवानिवृत्त फौजी बद्रीलाल चौहान का है। चौहान की कंपेल के आगे उंडेल गांव में सर्वे नंबर 72 की जमीन है। जमीन पर खेती के साथ में उन्होंने 100 गुणा 200 फीट का एक तालाब खुद के खर्च पर बनवाया ताकि मछली पालन कर सकें। चौहान को अपनी जमीन पर जाने के लिए सर्वे नंबर 79 की सरकारी जमीन से होकर गुजरना पड़ता है। 28 मार्च 2021 को राजेश व प्रेमनारायण हरिसिंह निवासी सेमल्या चाऊ ने इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। रास्ता रोककर उस पर वेयर हाउस तान दिया।
दूसरी तरफ से भागीरथ दांगी सेम्लाय रायमल ने भी रास्ता रोक दिया। चौहान को अपनी जमीन पर आने-जाने का रास्ता ही नहीं रहा। इसको लेकर उन्होंने तहसीलदार की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में मामला सही पाया गया। तहसीलदार ने कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। कुछ दिनों पहले सैनिक कल्याण बोर्ड ने कलेक्टर मनीष सिंह और पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र को पत्र लिखकर सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही ये भी बताया कि पूर्व में तहसीलदार ने आदेश कर दिए थे, जिसकी अवहेलना हो रही हैं।
शिकायत करने के बावजूद सरकारी जमीन पर से कब्जा नहीं हट रहा है। हम अपनी ही जमीन पर जाने के लिए परेशान हो रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस फेर में मेरा लाखों रुपए का नुकसान हो चुका है।
बद्रीलाल चौहान, पूर्व सैनिक
मर गई मछलियां
चौहान ने तालाब में लाखों रुपए की छोटी-छोटी मछलियां लाकर डाली थीं। उनकी देख रेख का समय आया तो सरकारी जमीन पर क?जा हो गया। अपने ही खेत पर आने-जाने का रास्ता नहीं होने से वे परेशान होते रहे। इस बीच में ध्यान नहीं देने से सारी मछलियां मर गईं, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान हो गया।
ऐसे मिला था सम्मान
फौजी चौहान गंगटोक में पदस्थ थे और दादर-गुवाहाटी एस्सप्रेस ट्रेन से जा रहे थे। उस दौरान बिहार के कटिहार व नोगछिया के बीच डकैतों ने ट्रेन को रोक दिया और लूटपाट शुरू कर दी। चौहान ने बोगी को लुटने से बचाना शुरू किया तो डकैतों से मुठभेड़ हो गई। उस दौरान उन्हें गोली लगी लेकिन चौहान ने बोगी को लुटने से बचा लिया। बाद में राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्य चक्र पदक से सम्मानित किया। गौरतलब है कि चौहान सहित पांच भाई हैं। तीन फौज में थे, जो अब रिटायर हो गए। वहीं, एक पुलिस में एएसआई व दूसरा प्राइवेट नौकरी करता है।

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