जरूरी खबर : दांत काले होने के साथ टूटने लगेंगे अगर पानी में इस चीज की मात्रा है ज्यादा

दांत काले होने के साथ टूटने लगते हैं।

By: हुसैन अली

Updated: 19 Jan 2019, 10:06 AM IST

इंदौर. हमारी टीम ने अलग-अलग राज्यों में शोध कर पता लगाया कि पानी में कितना फ्लोराइड होता है। इसकी मात्रा ज्यादा होने से भी दांत का रंग बदल जाता है। दांत काले होने के साथ टूटने लगते हैं। ज्यादा फ्लोराइड से किडनी और हड्डी पर भी असर होता है। यह बात यूके से आए डॉ. चित्ता चौधरी ने शुक्रवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुई तीन दिनी 72वीं इंडियन डेंटल कॉन्फ्रेंस में कहीं।
उन्होंने कहा, मैं कर्नाटक के कुछ गांवों में भी सेवा देता हूं। वहां ज्यादा फ्लोराइड के चलते लोगों के दांत घिसे हुए हैं। इससे वे सामाजिक स्तर पर भी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। देश की आजादी के बाद से पानी में फ्लोराइड की मात्रा लगातार बढ़ी है। इसे रोकने के निदान भी नहीं किए गए। सरकार इन शहर व गांवों में पानी साफ करने के प्लांट लगाए, क्योंकि इसकी कम मात्रा भी नुकसान बढ़ाती है। टूथपेस्ट भी फ्लोराइड की मात्रा देखकर ही खरीदें। कई मल्टीनेशनल कंपनियां टूथपेस्ट पर इसकी मात्रा लिखती हैं। शाम को कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ पर नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह ने पहुंचकर ब्रोशर का विमोचन किया। ऑर्गनाइजिंग सेके्रटरी डॉ. मनीष वर्मा ने बताया, शनिवार को 70 से ज्यादा साइंटिफिक सेशन, एनुअल अवॉर्ड सेरेमनी होगी। कॉन्फ्रेंस में आइप्रोस्टेट, ऑर्थोडेंटिक ट्रीटमेंट, मेग्जिलो फेशियल सर्जरी व इम्प्लांट्स सहित दांतों से जुड़े विषय पर बात हुई।

कैंसर के केस चिंता की बात
डॉक्टर डेंटल कॉउंसिल ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट डॉ. दिव्येन्दु मजूमदार ने कहा, आज हर अस्पताल में 40 फीसदी कैंसर के केस हैं, जो चिंता की बात है। हमारे अधीन 313 डेंटल कॉलेज हैं, जिनमें से 290 के स्टूडेंट्स को लोगों को तंबाकू छोडऩे व इसका असर कम करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह जागरूकता कैंसर के केस कम करेगी। हृदय रोग, शुगर की बीमारियों में भी कमी आएगी। दांत व मुंह की सफाई ठीक से न होने से कई अंग प्रभावित होते हैं।

दांत की भी स्टेम सेल बैंकिंग
कर्नाटक की डॉ. महिमा दांड ने कहा, स्टेम सेल थैरेपी के माध्यम से हम दांतों को निकालने के बजाय पुराने दांतों को बचाते हैं। अब दांतों की स्टेम सेल बैंकिंग भी होने लगी है। ये शरीर की किसी भी कोशिका से मिलता-जुलता होता है। इसमें ये तकनीक उपयोगी है। महाराष्ट्र से आए डॉ. साई कल्याण ने बताया, अब खराब दांत के लिए एडवांस्ड मटेरियल के उपयोग से 30 फीसदी मामलों में रूट केनाल की जरूरत नहीं पड़ती।

हुसैन अली
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