29 साल बाद भी हक की राशि नहीं मिलने पर सड़क पर उतरेंगे हुकमचंद मिल के मजदूर

- 100 से अधिक मजदूरों ने बैठक कर लिया निर्णय, चरणबद्ध आंदोलन चलाने की तैयारी

 

- कोर्ट में विचाराधीन 20 साल पुरानी याचिका पर सुनवाई में भी नगर निगम लगातार नहीं दे रहा जवाब

- कोरोना काल में 125 से अधिक मिल मजदूरों की हो चुकी है मौत

इंदौर.शहर की सबसे पुरानी हुकमचंद मिल को बंद हुए 29 वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन वहां काम करने वाले 5800 से अधिक मजदूर और उनके परिजन अपने हक के बकाया रुपयों के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। मिल की जमीन बेचकर मजदूरों सहित अन्य लेनदारों को उनकी राशि चुकाने से जुड़ा आदेश हाई कोर्ट भी कर चुका है, लेकिन कागजी लेटलतीफी और कानूनी पेंचों के चलते उन्हें रुपए नहीं मिल रहे हैं। कोरोना काल में पिछले 16 महीने में 125 से अधिक मजदूरों की मौत हो चुकी है। कुल 2200 मजदूर पिछले 29 साल में देह त्याग चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी मजदूरों को बकाया राशि नहीं मिली है। करीब 179 करोड़ रुपए मजदूरों को मिलना है। पैसा नहीं मिलने और लगातार वृद्ध मजदूरों की मौत होने के चलते अब मजदूरों ने सड़क पर उतकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर ली है। मिल की साप्ताहिक बैठक में करीब 100 मजदूरों ने चरणबद्ध आंदोलन चलाने की तैयारी की है।

सरकार और निगम के खिलाफ करेंगे झंडा बुलंद

मजदूर नेता हरनामसिंह धालीवाल और नरेंद्र श्रीवंश ने बताया, कोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम और सरकार की हठधर्मिता के चलते मजदूरों को उनका हक का पैसा नहीं मिल रहा है। बिना वजह कानूनी पेंच डाला जा रहा है। नवरात्रि से आंदोलन शुरू किया जाएगा। मिल की 42 एकड़ जमीन बेच कर हमारे रुपए दिए जाना चाहिए।

एक साल से टाइम बाउंड कार्यक्रम का इंतजार

करीब एक साल पहले कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिए थे कि वे मजदूरों को पैसा चुकाने का टाइम बाउंड कार्यक्रम पेश करे। लेकिन अब तक पेश नहीं किया गया है। कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिए हैं कि मिल की जमीन पर किए गए अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है। 179 करोड़ रुपए देना है मजदूरों को हुकमचंद मिल के करीब 5800 मजदूरों के बकाया 179 करोड़ रुपए की राशि लौटाई जानी है। कोर्ट के आदेश के बावजूद निगम ने मजदूरों को उनका पैसा चुकाने का कोई प्लान नहीं दिया है। मजदूर नेताओं का कहना है, 12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल बंद हो गई थी। तब से ही मजदूर मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। करीब 5800 मजदूरों का 229 करोड़ रुपए बकाया था जिसमें से कोर्ट की सख्ती के बाद अब तक सिर्फ 50 करोड़ रुपए मिला है।

विकास मिश्रा
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