8 लाख स्टूडेंट्स ने अपनाया गांधी के आदर्शों का एनर्जी स्वराज, 10 लाख छात्रों को बनाएंगे सोलर एंबेसेडर

8 लाख स्टूडेंट्स ने अपनाया गांधी के आदर्शों का एनर्जी स्वराज, 10 लाख छात्रों को बनाएंगे सोलर एंबेसेडर

Reena Sharma | Publish: Aug, 14 2019 01:05:14 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

प्रकृति को बचाने के लिए 10 लाख छात्रों को सोलर एंबेसेडर बनाएंगे प्रोफेसर सोलंकी

इंदौर. आज दुनिया को महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की तरह एनर्जी स्वराज की जरूरत है। एनर्जी स्वराज का अर्थ है जब एक समुदाय खुद ऊर्जा का उत्पादन करेगा और उससे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा। मौजूदा परिदृश्य में दुनिया की ऊर्जा जरूरतें विरोधात्मक हैं। जहां पर एक ओर सर्वव्यापी ऊर्जा तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा के अत्यधिक इस्तेमाल से जलवायु पर बहुत बुरे प्रभाव आ रहे हैं। इस संतुलन को सिर्फ सौर ऊर्जा के माध्यम से ही बनाया जा सकता है।

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यह बात भारत के सोलर मैन, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर चेतनसिंह सोलंकी ने इंदौर में कही। वे यहां गांधी ग्लोबल सोलर यात्रा (जीजीएसवाय) के तहत आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने आए थे। सोलंकी ने दिसंबर 2018 में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम से इस यात्रा की शुरुआत की थी। अब तक उन्होंने 30 से अधिक देशों की यात्रा की है। इसी यात्रा के भारतीय संस्करण के तहत वे देश के 50 शहरों की यात्रा कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे मंगलवार को इंदौर पहुंचे। सोलंकी ने इंदौर में आईआईटी इंदौर, एसजीएसआईटीएस, चमेली देवी समूह शैक्षणिक संस्थान और प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के कैंपस में विद्यार्थियों से सौर उर्जा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने की बातचीत की। साथ ही सोलर लैंप असेंबली के बारे में भी जानकारी दी। सोलंकी ने इंदौर केन्द्रीय कारावास में कैदियों से ऊर्जा स्वराज और गांधी विचारधारा के बारे में भी बात की।

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सोलंकी ने कहा, दुनिया का तापमान पहले ही करीब 1 प्रतिशत तक बढ़ गया है। 2018 आईपीसीसी रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे में दुनिया को वर्ष 2050 तक सिर्फ 31 सालों में 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करने की जरूरत है, इसलिए मौजूदा ऊर्जा उत्पादन परिदृश्य और इसके डिलीवरी मैकेनिज्म पर फिर से विचार करना होगा।

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गांधी के विचारों से प्रेरित है यात्रा: सोलंकी ने बताया, यह नेक कार्य अहिंसा, स्वराज और आत्म-निर्भरता के गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है। इसकी शुरुआत साबरमती आश्रम से इसीलिए की गई, क्योंकि यह आजादी के लिए गांधीवादी संघर्ष का समानार्थी रहा है। प्रोफेसर सोलंकी ने इसीलिए इसे एनर्जी स्वराज का नाम दिया और इसके प्रचार के लिए विभिन्न देशों की यात्रा कर रहे हैं।

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एक दिन में 10 लाख लोगों को सोलर लैंप बनाने का प्रशिक्षण देंगे सोलंकी

इस यात्रा के समापन पर स्टूडेंट सोलर एंबेसेडर वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जहां 10 लाख से अधिक स्टूडेंट्स को 2 अक्टूबर 2019 को सोलर लैंप बनाने का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। बाद में यही स्टूडेंट सोलर एंबेसेडर के रूप में काम करेंगे। अभी तक 8 लाख छात्र इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। इसमें 101 देशों के छात्र शामिल हैं।

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