सरकार चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की, इनका चलता है सिक्का

राजनीतिक दलों के नेताओं का चलता है रौब, चैलेंज देकर करा देते हैं तबादला

By: Hitendra Sharma

Published: 20 Jan 2021, 09:35 AM IST

इंदौर. मध्य प्रदेश में सरकार चाहे कांग्रेस की रही या भाजपा की, दोनों ही दलों की सरकारों के समय नेतागीरी का तरीका रसूख जमाकर आवाज दबाने की ही रहा। कांग्रेस सरकार में दो मामलों में शासकीय कर्मचारी को तबादला और लाइन अटैच की कार्रवाई झेलनी पड़ी। वहीं भाजपा शासन में भी मंत्री पर आरोप लगाया तो वनपाल का तबादला हो गया। इसके पहले मुख्यमंत्री का गर्म भोजन न दे पाने पर जिला खाद्य अधिकारी को पहले निलंबित कर बहाल किया फिर अटैच कर दिया।

महिला सूबेदार का हुआ तबादला
(14 अप्रैल 2019)
राजीव गांधी चौराहे के पास तत्कालीन मंत्री सज्जनसिंह वर्मा के पार्षद भतीजे अभय वर्मा को ट्रैफिक पुलिस की महिला सूबेदार ने रोका। अभय पर गाड़ी चलाते हुए मोबाइल फोन पर बात करने का आरोप था, जबकि अभय ने रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। चेकिंग प्रभारी महिला सूबेदार सोनू वाजपेयी से विवाद हुआ। मंत्री के भतीजे ने तबादला कराने की धमकी दी। 2 महीने बाद सोनू वाजपेयी का छतरपुर तबादला हो भी गया। सूबेदार ने कोर्ट की शरण ली तो तबादला रुका।

बात नहीं मानी तो कर दिया लाइन अटैच
(3 अप्रैल, 2019)
राजबाड़ा चौक पर चेकिंग के दौरान सूबेदार अरुणसिंह का कांग्रेस नेता अखिलेश जैन से विवाद हुआ था। आरोप था कि कांग्रेस नेता चालान नहीं बनाने का दबाव बना रहे थे लेकिन सूबेदार ने बात नहीं मानी। इस विवाद का असर रहा कि सूबेदार अरुणसिंह को तत्कालीन एसएसपी रुचिवर्धन सिंह ने लाइन अटैच कर दिया। सूबेदार को तनाव प्रबंधन की ट्रेनिंंग के नाम पर हटाया गया, जबकि मुख्य कारण कांग्रेस नेता की बात नहीं मानना था।

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