द. अफ्रीका की मैराथन में दौड़े शहर के ये रनर्स, बोले - इंडिया-इंडिया के नारे लगने से बढ़ा जोश

द. अफ्रीका की मैराथन में दौड़े शहर के ये रनर्स, बोले -  इंडिया-इंडिया के नारे लगने से बढ़ा जोश

Reena Sharma | Updated: 14 Jun 2019, 05:00:35 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

शहर वापसीे पर जोरदार स्वागत: पत्रिका से साझा किए अपने अनुभव

इंदौर. जब परदेश में आपका हौसला बढ़ाने के लिए हजारों लोग इंडिया-इंडिया का नारा लगाएं तो जोश बढऩा स्वाभाविक है। अपनों के इसी सहयोग ने हमें दुनिया की प्रमुख मैराथन में से एक इस रेस में आगे बढऩे का उत्साह दिया। ये कहना है 9 जून को दक्षिण अफ्रीका के जटिल पहाड़ों में हुई कामरेड अप रन मैराथन में हिस्सा लेकर शहर लौटे एथलीट्स का। डॉ. आशुतोष व्यास, डॉ. अमित बंग, इंजीनियर राजेश पोरवाल और सहायक आयुक्त विजय सोहनी 9 जून को डरबन में हुई 87 किमी की इस रेस को पूरा कर गुरुवार को शहर लौटे। उन्होंने बताया, मैराथन में सभी को पांच बड़ी पहाडिय़ों और कई छोटी पहाडिय़ों से होकर गुजरना था। रेस डरबन से शुरू होकर पीटरमैरिट्सबर्ग पर खत्म हुई।

सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया

डॉ. अमित बंग (41) बताते हैं कि इसे अल्टीमेट ह्यूमन रेस कहा जाता है और ये बात सार्थक भी हुई। इसमें हमें एक हजार मीटर एलीवेशन मिला और 87 किमी की रेस अपने आप में एक चैलेंज थी। तीसरा बड़ा चैलेंज था ह्यूमिडिटी क्योंकि ये समुद्र से लगा शहर था। इस वजह से मुझे क्रैम्प्स (मांसपेशियों में खींचाव) की समस्या का भी सामना करना पड़ा। इस वजह से मैं 67 किमी की रेस ही कम्पलीट कर पाया लेकिन मैंने वहां सबसे अधिक सकारात्मक ऊर्जा महसूस की। 10 हजार वॉलेंटियर्स थे जो आलू, केले और एनर्जी ड्रिंक लेकर खड़े थे।

 

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स्ट्रेटजी से कम्पलीट की रेस : राजेश पोरवाल (54) ने बताया, ये रेस एक बहुत बड़ा चैलेंज था। जब आप इतने सारे रनर्स के साथ आगे बढ़ते हंै तो आपके जीवन में कई बदलाव आते हैं। ये आपको नई पॉजिटिविटी देते हैं। मैं 6 महीने से तैयारी कर रहा था। ये रेस मैंने 10 घंटे 47 मिनट में खत्म की। फस्र्ट हाफ में ऊर्जा को बचाकर रखा और स्पीड़ कम रखी। जो मददगार साबित हुई। क्रैम्प्स की परेशानी हुई लेकिन बढ़ता रहा।
टाइम मैनेजमेंट से मिली सफलता

विजय सोहनी (57) ने बताया, मैंने महसूस किया कि वहां भारतीयों का बड़ा आदर है। मुझे रेस की लंबाई से काफी प्रेशर महसूस हो रहा था तो मैंने शॉर्ट टारगेट सेट किए। रेस में 6 कट ऑफ पॉइंट थे जैसे 18 किमी की रेस दो घंटे 40 मिनट, 29.5 किमी साढ़े चार घंटे, 44 किमी 6 घंटे 10 मिनट में तय करना था तो मैंने कम दूरी पर फोकस किया। 36 किमी और 44 किमी में क्रैम्प्स आए तो लगा कि नहीं कर पाऊंगा। ये रेस मैंने 11 घंटे 43 मिनट में कम्पलीट की थी। जब फिनिश लाइन पर पहुंचा तो आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

पिछले साल का अनुभव आया काम

रेस 10 घंटे 45 मिनट में पूरी करने वाले आशुतोष व्यास (36) ने बताया, मैंने पिछले साल भी रेस में हिस्सा लिया था। तब मैंने 11 घंटे 15 मिनट में इसे पूरा किया था। हर दिन दो से तीन घंटे और रविवार को 6 घंटे की प्रैक्टिस ही इस सफलता का परिणाम है। लगातार दोनों साल रेस में हिस्सा लेने के कारण बैक टू बैक मेडल मिला है और एक ब्रॉन्ज मिला है।

87 किमी लंबी रेस थी
25000 ने करवाया था रजिस्ट्रेशन
4 रनर्स थे मध्यप्रदेश से
204 एथलीट पहुंचे भारत से
16000 ने रेस में लिया हिस्सा

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