दिल में थे तीन छेद, सरकार और विभाग की लापरवाही से गई जान

दिल में थे तीन छेद, सरकार और विभाग की लापरवाही  से गई जान

Arjun Richhariya | Publish: Sep, 18 2017 05:11:23 PM (IST) | Updated: Sep, 18 2017 05:12:18 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

बैंगलुरू के नारायणा अस्पताल में सरकार की है 6 करोड़ रुपए उधारी, सरकार ने नहीं चुकाई उधारी, पच्चीस दिन की बच्ची की मौत के बाद कठघरे में अस्पताल

इंदौर/धार. बैंगलुरू का नारायणा अस्पताल। यहां दिल में छेद होने का इलाज किया जाता है। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर रोग से पीडि़त नौनिहालों को मुफ्त इलाज की सुविधा है, लेकिन इस सुविधा के तहत राज्य सरकार का 6 करोड़ रुपए का बिल बकाया हो गया। इस बकाया बिल के कारण धार के धामनोद की 25 दिन की मासूम बेबी का अस्पताल ने इलाज करने से इंकार कर दिया और बिना इलाज के ही 90 हजार रुपए भी ऐंठ लिए। इसके बाद आंखों में आशाओं की किरण लिए माता-पिता की यह रोशनी बिछड़ गई।


‘सरकार पैसा नहीं दे रही तो इसमें मेरा क्या कसूर...मेरे इलाज के लिए तो सीएमएचओ अंकल ने कहा कि वे पैसा देने को तैयार हैं...आप खर्च बताओगे और वे मेरे इलाज के लिए आपके खाते में रकम जमा कर देंगे...। मेरे साथ अमानवीयता मत दिखाओ, मैं अभी दुनियां देखना चाहती हूं...।’
दुनिया में आने के बाद २५ भोर भी नहीं देख पाने वाली मासूम की आत्मा अब अस्पताल प्रबंधन और सरकार से चीख-चीख कर अपनी मौत का हिसाब मांग रही है। उसकी मौत का जिम्मेदार तो देर-सबेर साबित हो जाएगा, लेकिन उस मां और परिवार पर क्या गुजर रही होगी, जो बच्ची की किलकारियों के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहता था। धार जिले के धामनोद की पच्चीस दिन की बच्ची बेबी सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ गई। रविवार की सुबह यह मासूम इलाज के अभाव में दुनिया को अलविदा कह चुकी थी।

नहीं जमा किए सरकार ने 6 करोड़
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर रोग से पीडि़त नौनिहालों को मुफ्त इलाज की सुविधा तो है, लेकिन सरकारी नीतियों (या जिद कहें) के कारण बैंगलुरु के नारायणा हॉस्पिटल का ६ करोड़ से अधिक का बिल बकाया होने से प्रबंधन ने ११ सितंबर को भर्ती हुई बच्ची का इस योजना में इलाज करने से मना कर दिया। प्रबंधन को मनाने की तमाम कोशिशें नाकाम रही। सरकार से लेकर स्वास्थ्य विभाग यहां तक कि जिला प्रशासन से भी चर्चा की गई, लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बिना इलाज करवाए ही पीडि़त परिवार को नारायणा का लगभग ९० हजार रुपए का बिल भी चुकाना पड़ा। मप्र सरकार की अनदेखी के कारण इलाज से इनकार के बाद बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया। जब उसे लेकर परिजन उपचार के लिए इंदौर आ रहे थे कि रास्ते में बच्ची ने दम तोड़ दिया। अगर अस्पताल प्रबंधन ने मानवता दिखाई होती तो आज वह मासूम जिंदा होती। गौरतलब है कि इस बच्ची को दिल में तीन छेद होने से उसकी सर्जरी होनी थी।

पिता ने ‘पत्रिका’ को दिया धन्यवाद

‘पत्रिका’ ने बच्ची के इलाज को लेकर स्थानीय प्रशासन से सरकार तक चर्चा की। ‘पत्रिका’ की पहल के बाद कलेक्टर श्रीमन शुक्ला व सीएमएचओ डॉ. आरसी पनिका ने नारायणा अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर सोमवार को उनके खाते में रकम जमा करने का आश्वासन भी दिया, लेकिन अमानवीयता दिखाते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बगैर इलाज बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया। हालांकि बच्ची अब इस दुनियां में नहीं रही, लेकिन ‘पत्रिका’ की इस पहल पर मासूम के पिता मनोज वर्मा ने धन्यवाद दिया है। इधर, कलेक्टर श्रीमन शुक्ला ने अफसोस जताते हुए खुद इस मामले की तह तक जाने की बात कही। उनका कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर इस मामले को लेंगे व पता करेंगे गलती कहां हुई।

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