नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो प्रेग्नेंसी में रखें इन बातों का ख्याल

नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो प्रेग्नेंसी में रखें इन बातों का ख्याल

By: amit mandloi

Published: 24 Jul 2018, 12:17 PM IST

इंदौर. महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान अपने आप से प्रेम करें और खुद पर विश्वास रखें। साथ ही मेडिटेशन एवं प्राणायाम नियमित रूप से करें जिससे की वे खुद को मेंटल व फिजिकल तौर पर फिट महसूस कर सकें। महिलाओं में बच्चे को नार्मल जन्म देने की शक्ति है, लेकिन वे उसे भूल चुकीं है। इसलिए जरूरी है कि गर्भधारण के साथ ही उन्हें नैचुरल बर्थ देने के लिए तैयार किया जाए।

 

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सोमवार को यह बात चोइथराम कॉलेज आफ नर्सिंग की प्रिंसिपल डॉ. उषा उकंडे ने कही। वे कॉलेज ऑडिटोरियम में ‘एम्पॉवरिंग प्रेग्नेंसी, बर्थिंग, लैक्टेशन एवं पैरेंटिंग’ विषय पर मौजूद पैरेंट्स एवं स्टूडेंटस को संबोधित कर रही थी। उन्होंने बताया कि कैसे महिलाएं नौ महीने अपने आप को फिजिकल व मेंटल रूप से तैयार करें जिससे की वे नार्मल डिलीवरी के लिए प्रिपेयर हो सकें। वर्कशॉप का लक्ष्य प्रेग्नेंसी, डिलीवरी, ब्रेस्ट फीडिंग और पैरंटिंग को सशक्त बनाना तथा नैचुरल बर्थ को बढ़ावा देना था।

फर्टिलिटी फिजिशियन डॉ. निकिता रावल ने कहा, भारत में प्रेग्नेंसी के समय का हौवा बनाया जाता है, जबकि यह सामान्य बात है। हमारे देश में ठीक इसका अपोजिट सिस्टम है। रूथ मलिक ने ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में कहा, मां का दूध बेबी के लिए सर्वोत्तम है। इससे बेबी का सर्वाधिक डवलपमेंट होता है। जानवरों का दूध जानवरों के बच्चों के लिए होता है न कि मनुष्य के बच्चों के लिए। पैरंटिंग कोच अभिषेक पसारी ने बताया कि कैसे माता-पिता अपने बच्चों के खाली पेपर जैसे दिमाग को ट्रेंड कर सकते हैं।
कार्यक्रम में 50 से अधिक गर्भवतीं, धात्री माताएं एवं कई महिलाएं अपने पति व बच्चों के साथ उपस्थित थीं। प्रो. प्राची अवस्थी ने स्पीकर्स का परिचय दिया। डॉ. उषा उकांडे ने ‘उषा बर्थ नेटवर्क’ का लॉन्च किया।

करें ये उपाय

स्वस्थ रहें
डिलीवरी से पहले आपको ये सुनिश्चित कर लेना होगा कि आप पूरी तरह से स्वस्थ रहें और किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी आपको न हो। आपके शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए। गर्भवती महिला को खुद को मानसिक रूप से इस बात के लिए तैयार रखना चाहिए कि डिलीवरी के समय उसे बहुत तकलीफ होने वाली है। ऐसे में खुद को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है।

सही आहार लेना है बहुत जरूरी
आपने कई बार सुना होगा कि गर्भवती महिला को अपने खाने-पीने का पूरा ध्यान रखना चाहिए। ऐसे समय में केवल भूख को शांत करना जरूरी नहीं है। गर्भवती महिला काे ऐसा खाना खाना चाहिए जिससे उसे संपूर्ण आहार मिले। प्रेग्नेंसी में आयरन और कैल्शियम लेना बहुत जरूरी है। सामान्य डिलीवरी में काफी ब्लड लॉस होता है लेकिन सिजेरियन में और भी ज्यादा। ऐसे में शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए।

पानी पीते रहें
गर्भ में बच्चा एक थैली में रहता है। इस थैली को एमनियोटिक फ्लूड कहते हैं। इसी से बच्चे को ऊर्जा मिलती है। ऐसे में मां के लिए ये जरूरी है कि वो हर रोज आठ से दस गिलास पानी पिए।

टहलना
एक वक्त था जब गर्भावस्था में महिलाओं को चलने-फिरने से भी मना कर दिया जाता था। पर प्रेग्नेंट होने का मतलब बीमार होना बिल्कुल नहीं है। भारी काम करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन हिलना-डुलना बंद कर देना सही नहीं है।

व्यायाम करें और तनावमुक्त रहें
गर्भावस्था में ये बहुत जरूरी है कि गर्भवती महिला खुश रहे। उसे किसी प्राकार का कोई तनाव न हो। मां की मानसिक स्थिति का सीधा असर बच्चे के जन्म और डिलीवरी पर पड़ता है।

अगर आप नेचुरल चाइल्ड बर्थ ऑप्ट करने की सोच रही हैं तो इन बातों का ख्याल रखें :

- ये पूरी तरह से नॉन-इनवेसिव होता है इसीलिए आपको या आपके होने वाले बच्चे को इससे कोई नुकसान होने या साइड इफ़ेक्ट होने की पॉसिबिलिटी बहुत कम होती है ।

- क्योंकि यहां सिर्फ आप अपने आप को कण्ट्रोल करती हैं जिससे ज्यादातर महिलाएं लेबर पैन को आसानी से झेल लेती हैं । ऐसा इसीलिए हो पाटा है क्योंकि जब आप खुद को अपने बॉडी का इंचार्ज मान लेते हैं तो उस दर्द का परसेप्शन कम हो जाता है ।

-“ वेजाइनल बर्थ में शरीर में किसी तरह के कोई भी अंदरूनी या बाहरी निशान या स्कार्स नहीं पड़ते हैं”।

– सर्टिफाइड प्रेगनेंसी लैक्टेशन एंड चाइल्ड न्यूट्रीशन काउंसलर सोनाली शिवलानी ।

- सीजेरियन सेक्शन के मुकाबले इसमें रिकवरी बहुत तेज़ी से होती है । वेजाइनल बर्थ में महिलाएं मां बनने के एक महीने बाद से ही अपने नार्मल कम को शुरू कर सकती हैं ।

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