टीएंडसीपी संयुक्त संचालक से बोलें लोकायुक्त, आपने अनुमति कैसे रोकी? जानें क्या है पूरा मामला

जांच और शिकायत के आधार पर लेटलतीफी पर बिफरे लोकायुक्त..

इंदौर. लोकायुक्त एनके गुप्ता के सोमवार को तल्खी भरे तेवर दिखे। प्रतिवेदन पेश करने में आनाकानी देख अफसरों पर बिफरे और जमकर फटकार लगाई। बिग मॉल की शिकायत पर अनुमति रोकने के मसले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के संयुक्त संचालक राजेश नागल को आड़े हाथों लेते हुए कहा, क्या प्रकरण में लोकायुक्त या कोर्ट का स्टे है? आप लोगों को परेशानी में क्यों डाल रहे हैं?

इंदौर संभाग के 21 प्रकरणों में प्रतिवेदन पेश नहीं होने पर लोकायुक्त संगठन ने रेसीडेंसी पर संबंधित विभाग के अफसरों की उपस्थिति में सुनवाई की। सुपर कॉरिडोर पर बिग मॉल के मसले पर यूं चली जिरह।


मॉल निवेशक कंपनी
सरकार से अनुबंध के आधार पर जमीन लेकर प्रोजेक्ट बनाया है। जो जमीन ली, उस पर मॉल, व्यावसायिक संस्थान और आवासीय प्रोजेक्ट का करार हुआ था। विभाग को नक्शा स्वीकृति का आवेदन दिया तो फाइल रोक दी गई। साथ ही कहा, इस जमीन पर आवासीय अनुमति दी जा सकती है। एप्रोच किया तो हाल ही में पत्र लिखकर बताया, आपके मामले में लोकायुक्त में शिकायत विचाराधीन है।

निराकरण होने तक अनुमति नहीं दे सकते। इस पर लोकायुक्त संगठन से प्रकरण का स्टेटस मांगते हुए निराकरण के लिए कहा है।


लोकायुक्त संगठन

कई दिनों से नगर व ग्राम निवेश विभाग से प्रतिवेदन मांग रहा है। नहीं मिलने पर सोमवार को लोकायुक्त ने टीएंडसीपी संयुक्त संचालक नागल तलब किया। उनसे कहा, आपने लोकायुक्त की शिकायत के आधार पर अपनी प्रक्रिया क्यों रोक दी। नागल ने जवाब नहीं दिया तो लोकायुक्त बोले, क्या कार्रवाई पर स्टे दिया गया है? जब लोकायुक्त या कोर्ट का स्टे नहीं है तो आप इस तरह पत्र लिख ही नहीं सकते। आप विधि सम्मत, तकनीकी और तर्क पूर्ण आधार बताएं। लोकायुक्त को शिकायत के आधार पर मामले नहीं रोकें।

तीन महीने में 63 को किया ट्रैप
प्र देश के लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने सोमवार को कहा, संगठन का पारदर्शिता पर जोर है। मंत्री, विधायक के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के सबूत मिलेंगे तो बेहिचक केस दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा, तीन महीने में प्रदेश में 63 को रिश्वत लेते पकड़ा, जबकि 5 के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति और 11 पर पद के दुरुपयोग का केस दर्ज किया है। 90 दिनों में कुल 79 कार्रवाई हुई है। इंदौर संभाग में 12 रिश्वते लेते और 6 अन्य समेत 18 केस सामने आए हैं। अनुपातहीन संपत्ति के केस में 6.61 करोड़ रुपए जब्त किए, जबकि पद के दुरुपयोग के मामलों में 7 करोड़ सरकारी खजाने में जमा कराए हैं।


करना होगा कानून में संशोधन
लोकायुक्त गुप्ता ने कहा, कार्रवाइयों की गति में तेजी आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पुलिस को स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार मामलों में शिकायत की विवेचना 7 दिन में करें। नहीं हो तो 4 सप्ताह की विशेष अनुमति लें। मामला एफआईआर लायक न हो तो शिकायत संगठन को भेज दें। अभियोजन स्वीकृति के मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की गाइडलाइन तय की है।

अभियोजन की स्वीकृति देने का अधिकार सरकार का है। अनुमति नहीं मिलने पर चालान या प्रकरण पेश करने के लिए कानून में संशोधन करना होगा।


चंदननगर टीआई से बोले, आप पर दर्ज करा दें केस?
चंदन नगर थाने से संबंधित मामले में फरियादी ने शिकायत की कि टीआई जांच के नाम पर परेशान कर रहे हैं। जमीन की फर्जी रजिस्ट्री को लेकर टीआई योगेश तोमर बार-बार नोटिस जारी कर रहे हैं। लोकायुक्त ने टीआई से पूछा, क्या मामला धोखाधड़ी का है? टीआई ने कहा, जांच कर रहे हैं।

लोकायुक्त ने पूछा कब तक जांच करेंगे, यह तो सिविल मेटर है, इसका निराकरण तो कोर्ट से होगा। आप विरोधी पक्ष को फायदा तो नहीं पहुंचाना चाहते हैं? शिकायत से एेसा ही लगता है, क्यों नहीं आपके खिलाफ धारा 7 में प्रकरण दर्ज करा दिया जाए।


तीन घंटे चली सुनवाई...
लोकायुक्त ने करीब तीन घंटे तक सुनवाई में प्रशासन, नगर निगम, आईडीए, पुलिस, टीएंडसीपी, पंचायत विभाग, शिक्षा विभाग, बिजली कंपनी, जल संसाधन विभाग के मामले सुने।

मयूर नगर व खजराना में सरकारी जमीन पर कॉलोनी बसाने के मामले में लोकायुक्त ने कलेक्टर निशांत वरवड़े और निगमायुक्त मनीषसिंह को भी तलब किया। जस्टिस गुप्ता ने प्रकरणों को सिलसिलेवार सुनकर अफसरों से जवाब तलब किए। ४ केस में दिए जवाब से संतुष्ट होकर बंद करने के निर्देश दिए।


गत वर्ष के मुकाबले कम केस सामने आए....
लोकायुक्त संगठन की दो वर्ष की कार्रवाइयों की तुलना करें तो 2016-17 के मुकाबले 2017 -18 में पद के दुरुपयोग के मामले आधे भी नहीं रहे। हालांकि रंगेहाथों लेते पकड़ाने वालों की संख्या लगभग बराबर है।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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