परिवहन विभाग के कायदे में उलझा बड़े वाहनों का निर्माण

चेचिस के अस्थायी पंजीयन को हर माह रिन्यू कराने के नियम से परेशान उद्योगपति

By: रमेश वैद्य

Published: 10 Jun 2021, 01:51 AM IST

इंदौर. परिवहन विभाग के एक नियम से इन दिनों उद्योगपति परेशान हैं। फायर ब्रिगेड़, एम्बुलेंस व अन्य बड़े वाहनों का निर्माण करने वाले उद्योगपतियों को हर बार चेचिस रजिस्ट्रेशन के रिन्यू के लिए उन्हें आरटीओ कार्यालय आना पड़ता है। साथ ही अतिरिक्त खर्च का बोझ भी उठाना पड़ता है। आरटीओ से मिलकर उद्योगपतियों ने समस्या रखी, लेकिन नियमों से बंधे होने के कारण आरटीओ ने हाथ खड़े कर दिए। दरअसल, शहर में करीब 5 फैक्ट्रियां ऐसी है, जो फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य बड़े वाहन बनाने का काम करती हैं। इन फैक्ट्रियों में बनी गाडिय़ां कई राज्य सरकार खरीदती हैं। इनके निर्माण में उद्योगपति सरकारी नियमों से परेशान हो रहे हैं। एक ओर सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नियम शिथिल करने की बात करती है। वहीं, दूसरी ओर परिवहन विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है।
फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी गाडिय़ों के निर्माण करने वाले उद्योगपति चेचिस खरीदते हैं। इसी पर निर्माण किया जाता है। एक गाड़ी के निर्माण में ५ माह का समय लगता है। निर्माण अवधि तक चेचिस का अस्थायी पंजीयन आरटीओ कार्यालय में करना पड़ता है, जो कि केवल एक माह की ही होता है। इसके लिए प्रत्येक माह आरटीओ के चक्कर लगाना पड़ते हैं।
प्रक्रिया नियम में नहीं
उद्योगपति प्रमोद डफरिया, आरटीओ जितेन्द्र सिंह रघुवंशी से मिले और चेचिस के अस्थायी रजिस्ट्रेशन की अवधि तीन माह करने की मांग की, लेकिन रघुवंशी ने इस तरह की प्रक्रिया नियम में नहीं होने के कारण असमर्थता जता दी। प्रमोद डफरिया ने बताया कि सरकार को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। इससे समय और पैसा दोनों की बर्बादी है।

रमेश वैद्य Desk
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