यूनिवर्सिटी ने घोषित किया बीएड का विवादित रिजल्ट, तीन सदस्यीय समिति करेगी जांच

यूनिवर्सिटी ने घोषित किया बीएड का विवादित रिजल्ट, तीन सदस्यीय समिति करेगी जांच

Reena Sharma | Publish: May, 11 2019 12:57:53 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

तीन विषय की कॉपियां दोबारा नहीं जांचने पर 59 फीसदी हुए पास

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने बीएड दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा का विवादित रिजल्ट आखिरकार जारी कर दिया। शुक्रवार देर शाम को घोषित हुए परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। पहले इस नतीजे में जहां 96 फीसदी विद्यार्थी पास हो रहे थे वहीं अब 59 फीसदी पास हो पाए हैं। जबकि तीन विषय की कॉपियां दोबारा जंचवाई नहीं गई। जानकारों की मानें तो ये कॉपियां जंचती तो मुश्किल से 40 फीसदी विद्यार्थियों को सफलता मिल पाती। रिजल्ट तैयार करने में हुई गड़बड़ी का पता लगाने के लिए कुलपति ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

शंका होने पर कॉपियों की कराई सेंपलिंग

दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में कुल 4456 विद्यार्थी शामिल हुए थे। पहले जो रिजल्ट तैयार हुआ उसमें करीब 4200 विद्यार्थी पास हो गए। 80 फीसदी से ज्यादा परीक्षार्थी पास होने पर गोपनीय विभाग की डिप्टी रजिस्ट्रार रचना ठाकुर को शंका हुई और घोषित करने से पहले कुछ कॉपियों की सेंपलिंग कराई। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। परीक्षा विभाग और मूल्यांकन केंद्र के अफसरों ने ये ही रिजल्ट जारी कराने के भरसक प्रयास किए। कॉलेज संचालकों ने भी अपने स्तर पर दोबारा कॉपी जंचवाने से रोकने की कोशिश की थी। सभी विषय की सेंपलिंग कराने के बाद मिली गोपनीय रिपोर्ट पर कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ ने दोबारा मूल्यांकन कराया। वैकल्पिक विषयों को मिलाकर 10 में से सात विषय की कॉपी दोबारा जंचवाई गई। इसके बाद परिणाम पूरी तरह से बदल गए। 4411 का रिजल्ट जारी हुआ इनमें से सिर्फ 2628 ही पास हो पाए। बाकी परीक्षार्थियों को असफलता मिली है। सूत्रों की मानें तो बाकी तीन विषय की कॉपियां जंचवाई जाती तो रिजल्ट और बिगड़ सकता था। बीएड के रिजल्ट में आए भारी अंतर के बाद मूल्यांकन केंद्र की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।

शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

बीएड के मूल्यांकन में हुई गड़बड़ी को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने भी यूनिवर्सिटी से जानकारी तलब की है। इतनी बड़ी गड़बड़ी मूल्यांकन व परीक्षा विभाग के अफसरों की जानकारी के बगैर नहीं हो सकती। मूल्यांकन केंद्र प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह, बीएड के ओएसडी विभोर ऐरन पहले ही कुलपति से मिलकर सफाई दे चुके हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मूल्यांकनकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया। हालाकि, अब यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर जांच कराने की तैयारी में है। कुलपति ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

बीएड-एमएड के दूसरे राउंड में 34 हजार दावेदार

मेरिट सूची 13 को, अलॉटमेंट 20 को

इंदौर ञ्च पत्रिका. प्रदेश के बीएड-एमएड कॉलेजों में एडमिशन के लिए चल रही ऑनलाइन काउंसलिंग के दूसरे राउंड के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शुक्रवार को उच्च शिक्षा विभाग ने पात्र आवेदकों की संख्या जारी कर दी। बीएड-एमएड सहित आठों कोर्स में 34 हजार 714 उम्मीदवार एडमिशन की दौड़ में हैं। इनमें सिर्फ दूसरे राउंड में वेरिफिकेशन कराने वालों की संख्या 18 हजार 280 है। मेरिट सूची 13 मई को जारी की जाएगी, जबकि अलॉटमेंट 20 मई को होंगे। इस राउंड में सिर्फ बीएड के लिए 27 हजार 706 ने रजिस्ट्रेशन कराए, लेकिन 17 हजार 344 के ही डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन हो पाया। वेरिफिकेशन के लिए दसवीं, बारहवीं, ग्रेजुएशन की अंकसूची के साथ माइग्रेशन, टीसी, मूल निवासी, जाति प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। कॉलेज एसोसिएशन के अवधेश दवे का कहना है, कई आवेदकों के पास सभी दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन के बावजूद काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए।

दोषियों को बचा रहे कुलपति: डाबर

कार्यपरिषद (ईसी) सदस्य आलोक डाबर ने कुलपति पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया। वे बोले- जांच समिति बनाने का अधिकार ईसी को है। कई बार ईसी बैठक बुलाने के लिए पत्र लिखने के बावजूद कुलपति गंभीरता नहीं दिखा रहे। वे सीधे तौर पर दोषियों को बचा रहे हैं।

करेंगे कड़ी कार्रवाई

-बीएड के परिणामों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पहले जिन मूल्यांकनकर्ताओं ने कॉपियां जांची थीं उन्हें ब्लैकलिस्ट कर लिया है। दोषियों का पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। यूनिवर्सिटी के किसी सदस्य की भूमिका पाई जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रो.नरेंद्र धाकड़, कुलपति

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