विवि भूला देशभक्ति, सैनिकों के बच्चों को नहीं दे रहे नि:शुल्क शिक्षा

पुलवामा हमले के बाद हुआ था ट्यूशन फीस माफी का निर्णय, अब तक नहीं बन पाए नियम

अभिषेक वर्मा, इंदौर

देश के सैनिकों और शहीदों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का वादा कर वाहवाही लूटने वाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अपनी घोषणा पर अमल के मामले में फिसडड्डी साबित हुआ है। पिछले साल 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले के बाद शहीदों को श्रद्धांजली देने के लिए विवि ने कार्यपरिषद की बैठक में फैसला लेकर शहीदों व सभी सैनिकों के बच्चों को विभागों में नि:शुल्क शिक्षा देने का निर्णय लिया था लेकिन, एक साल बीतने के बाद भी ये घोषणा फाइलों में दबी है।

पुलवामा हमले में जवानों के शहीद होने की खबर सुनकर हर देशवासी स्तब्ध था। तब विवि प्रबंधन ने पहल करते हुए देशभक्ति दिखाई और शहीदों व सैनिकों के बच्चों को विभागों में मुफ्त और रियायती फीस पर शिक्षा देने का निर्णय लिया। कार्यपरिषद की बैठक में शहीदों के बच्चों के लिए पूरी फीस माफी और सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में 50 फीसदी की छूट देना का प्रस्ताव आया। सभी सदस्यों ने इसे सर्वसम्मति से मंजूर भी कर दिया। लेकिन, ये देशभक्ति झूठी साबित हुई है। सालभर बीतने के बावजूद इस फैसले को अमल में नहीं लाया गया। अब तक इस मसले पर कोई नियम तक नहीं बन सका न ही इस पर कोई जिम्मेदार कुछ बोलने को तैयार है। विवि की घोषणा से उत्साहित सैनिकों के बच्चों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। फीस माफी का प्रस्ताव लाने वाले पूर्व कार्यपरिषद सदस्य आलोक डाबर ने बताया, अगले ही सत्र (2019-20) से शहीद और सैनिकों के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिए जाना थे। अफसोस की बात है कि जिम्मेदार अफसर देश की सेवा करने वालों को लेकर ही गंभीर नहीं है। इनकी लापरवाही के कारण कैन्टोनमेंट के कई होनहार बच्चे थर्ड क्लास निजी कॉलेजों में पढ़ रहे है।

100 से ज्यादा बच्चों को नहीं मिला लाभ

महू सैन्य छावनी इंदौर के पास होने के कारण यहां परिवार के साथ बसे ज्यादातर सैनिकों के बच्चे इंदौर में ही पढ़ते है। सीईटी काउंसलिंग के साथ ही विभाग स्तर पर हुई काउंसलिंग प्रक्रिया में 100 से ज्यादा बच्चों ने इसी सत्र में देअविवि के विभागों में एडमिशन लिया है। कुछ बच्चों ने एडमिशन के दौरान नि:शुल्क शिक्षा के बारे में जानकारी चाही तो उन्हें विभाग स्तर पर ही प्रस्ताव विचाररत होने की जानकारी दी गई। कई बार इसकी जानकारी लेने की कोशिश करने के बाद अब बच्चों ने भी सवाल करना छोड़ दिया है। महू निवासी रिटायर्ड सैनिक बृजलाल पटेल का कहना है कि विवि ने ही देशभक्ति दिखाने के लिए शहीदों के बच्चों को फ्री और सैनिकों के बच्चों को रियायती दर पर पढ़ाने की घोषणा की थी। दु:खद है कि निजी कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिए विवि अब तक इसके नियम नहीं तैयार कर सका।

12 हजार से 90 हजार तक है फीस
यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभाग में हर कोर्स की अलग फीस है। आईएमएस, आईआईपीएस, स्कूल ऑफ कॉमर्स, आईईटी, स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, ईएमआरसी, स्कूल ऑफ फार्मेसी सहित 31 विभागों में छूट मिलना थी। इनकी फीस 12 हजार से लेकर 90 हजार रुपए सालाना है।

ये क्या कह रहे हो... मैंने देखे है मिनट्स

विवि प्रबंधन की वादाखिलाफी पर तत्कालीन कुलपति प्रो.नरेंद्र धाकड़ ने हैरानी जताई है। पत्रिका ने उनसे नियम तैयार नहीं होने की बात कही तो प्रो.धाकड़ का कहना था कि आप ये क्या कह रहे हो। सैनिक और शहीदों के बच्चों को फीस माफी का प्रस्ताव तैयार करने के बाद मिनट्स भी बन चुके थे। बैठक के मिनट्स मैंने देखे है। मुझे तो लगा था कि आदर्श विवि बनने जा रही देअविवि ने मिसाल भी पेश कर दी होगी।

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सैनिक और शहीदों के बच्चों को फीस में रियायत की जानकारी मुझे नहीं है। पूर्व में हुए फैसले की जानकारी ली जाएगी। अगर यह निर्णय पिछली कार्यपरिषद का है तो जल्द नियम तैयार कराए जाएंगे।

- प्रो.रेणु जैन, कुलपति, देअविवि

अभिषेक वर्मा Reporting
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