आवाज उठाई तो कर्मचारी को कर दिया बाहर

Arjun Richhariya

Publish: Oct, 12 2017 07:00:29 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
आवाज उठाई तो कर्मचारी को कर दिया बाहर

अन्याय: बिजली कंपनी की तकनीकी कर्मचारी साख संस्था का मामला, कर्मचारियों ने लगाए कई आरोप

इंदौर.वर्ष २००२ से शहर में बिजली बिल बांटने का काम देख रही तकनीकी कर्मचारी सहकारी साख संस्था में कई गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। कर्मचारियों से काम तो पूरा लिया जा रहा है, पर वेतन, भत्ते नहीं दिए जा रहे। जो लोग संस्था की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें नौकरी से बाहर कर देते हैं।
ऐसा ही मामला है तकनीकी कर्मचारी सहकारी साख संस्था के कैशियर पद पर कार्यरत रहे बाणगंगा निवासी दीपक मौर्य का। शिकायतकर्ता के मुताबिक, संस्था कर्मचारियों की सुविधाओं व भत्तों में हेरफेर कर रही है। कर्मचारियों का पीएफ जितना बनता है, उतना जमा नहीं किया जाता। नियमानुसार महीने में अधिकतम 26 दिन काम करवाया जा सकता है, लेकिन कर्मचारियों को पूरे 30 दिन सेवाएं देना पड़ती हैं। इसके बदले कोई अतिरिक्त भत्ता या पारिश्रमिक नहीं मिलता। जो कर्मचारी शिकायत करता है, उसे बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। दीपक के अनुसार, बिल बांटने के लिए ९० से १०० कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के बिल भुगतान काउंटर पर बिल संग्रहण का काम भी संभाल रहे हैं। सभी कुशल कर्मचारी की श्रेणी में आते हैं, लेकिन ठेकेदार इन कर्मचारियों को कलेक्टोरेट से घोषित दर से भी कम वेतन दे रहा है।

सालों से कर रहे काम
ठेकेदार से वेतन बढ़ाने को लेकर कर्मचारी कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। वह २००२ से ठेके का संचालन कर रहा है। इसमें ६० से ७० कर्मचारी १० वर्ष से भी अधिक समय से काम कर रहे हैं, फिर भी स्थायी नहीं हुए।

रिश्तेदारों को मनमाना वेतन
दीपक मौर्य के मुताबिक, संस्था कर्मचारियों के हित में बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर उनका शोषण कर रही है। साथ ही पद का दुरुपयोग करते हुए बेटों व रिश्तेदारों को बगैर किसी योग्यता के मनमाना वेतन दिया जा रहा है। उन्हें यहां हर तरह की सुविधाएं मिलती हैं। यहां तक कि उनकी गलतियों को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है।

शिकायत पर हटाया
"दीपक मौर्य के खिलाफ हमें कई शिकायतें मिली थीं, उसके बाद उन्हें हटा दिया। इस बात को भी काफी समय हो चुका है। बाकी जितने मामले हैं, उस पर मैं कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि प्रकरण कोर्ट में है। वैसे मैं अब अध्यक्ष पद से भी हट चुका हूं।"
रामसमुझ यादव, संचालक, तकनीकी कर्मचारी सहकारी संस्था

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