शादी-ब्याह, छुट्टी के सीजन में बस वालों ने फिर मचाई लूट

शादी-ब्याह, छुट्टी के सीजन में बस वालों ने फिर मचाई लूट

Arjun Richhariya | Publish: Apr, 17 2018 12:55:07 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

४०० से ५०० रुपए ज्यादा वसूल रहे किराया

इंदौर. हर बार की तरह इस बार भी बस वाले अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। शादी सीजन और छुट्टियों की भीड़ के चलते फिर बसों का किराया बढ़ा दिया गया है। यात्रियों के टिकट बुक करवाने पर मनमाना किराया वसूला जा रहा है। किराए की लूट आगामी १० दिनों तक जारी रहेगी, लेकिन परिवहन विभाग मौन साधे बैठा हुआ है।

शहर के निजी ट्रेवल्स आए दिन अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आते हैं। कभी सडक़ों पर नियम विरुद्ध अवैध बस अड्डे बना लिए जाते हैं, तो कभी कायदों से परे जाकर यात्रियों की जान की परवाह किए बगैर बसों की छतों पर लगेज ढोया जाता है। इन दिनों शादी-ब्याह की धूम और स्कूलों की छुट्टियों का फायदा उठाया जा रहा है। मुंबई और पुणे रूट पर सीट बुकिंग की मारामारी है। इसी के चलते बस ऑपरेटर प्रति सवारी सामान्य से ४०० से ५०० रुपए अधिक तक वसूल रहे हैं।

ज्यादा किराया वसूल रहे हैं तो जांच की जाएगी
निजी ट्रेवल्स संचालक अगर यात्रियों से ज्यादा किराया ले रहे हैं तो बसों की जांच की जाएगी। किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
-जितेंद्र सिंह रघुवंशी, आरटीओ

ज्यादा किराया देने को मजबूर हैं यात्री
यह पहला मौका नहीं है, जब बसों का किराया बढ़ाया गया हो। दीवाली, राखी और नए साल जैसे मौकों पर हर बार किराया बढ़ा दिया जाता है। बस से सफर करने वाले यात्री ट्रेवल्स वालों के आगे बेबस हैं। मजबूरी में यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। शहर से मुंबई और पुणे जैसे मुख्य रूटों पर करीब ३५ बसें चलती हैं। हंस, राजरतन, सिटीजन, सिटीलिंक और चौहान जैसे बड़े ऑपरेटरों ने बसों का किराया बढ़ा रखा है।

वापस आने की मारामारी
शहर से मुंबई और पुणे की आवाजाही ज्यादा रहती है। इंदौर से इन शहरों के लिए जाने के लिए सामान्य से करीब १०० रुपए से २०० रुपए ज्यादा वसूले जा रहे हैं, तो वहीं आने की बुकिंग की मारामारी ज्यादा है। दोनों रूट पर वॉल्वो का किराया १७००-१८०० रुपए और एसी के १२००-१३०० रुपए वसूले जा रहे हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में ४०० से ५०० रुपए ज्यादा है।

जिम्मेदार नहीं करते कार्रवाई
निजी ट्रेवल्स वाले आए दिन नियमों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार इन पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझते हैं। खुलेआम नियमों को ताक पर रखा जाता है फिर भी आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं करते हैं। इससे अफसरों और निजी ट्रेवल्स की मिलीभगत की आशंका को बल मिलता है।

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