दान से शिक्षा मंदिर का कल्याण

दान से शिक्षा मंदिर का कल्याण

Manish Yadav | Updated: 14 Jun 2019, 11:29:16 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

- पगड़ी रस्म में दान की परंपरा को ग्रामीणों ने बनाया समृद्ध
- निजी स्कूल को टक्कर दे रहा सरकारी विद्यालय

मनीष यादव @ इंदौर
परिजन की याद में मंदिर-धर्मशाला बनाने वाले तो हजारों मिल जाते हैं, लेकिन देपालपुर तहसील के छोटे से गांव नान्द्रा में अनोखी परम्परा है। यहां पर मंदिर या धर्मशाला के लिए दान तो दिया ही जाता है, उतना ही दान विद्यालय के लिए भी देते हैं। वर्षों से बदहाली की मार झेल रहे स्कूल के हालात सुधारने के लिए यह शुरुआत की गई और देखते ही देखते इतना दान आ गया कि अब सुविधाओं के मामले में यह स्कूल किसी निजी स्कूल को टक्कर देता है।
सरपंच कल्याण पटेल ने बताया कि गांव में पगड़ी की रस्म के दौरान परम्परानुसार मंदिर के लिए दान दिया जाता है। ऐसी ही पगड़ी की रस्म में बातों-बातों में गांव के माध्यमिक स्कूल की बात चली। पता चला कि स्कूल की बिल्डिंग तो है, लेकिन बिजली नहीं है। स्कूल भी शिक्षा का मंदिर है। सभी इस बात पर सहमत हुए कि भगवान का दिया हुआ ही भगवान को क्या दान करें। अगर स्कूल के लिए दान दिया जाए तो कई बच्चों का भविष्य सुधर जाएगा। इसके बाद जिसके यहां पगड़ी थी, उस परिवार ने पिता की स्मृति में 11 हजार रुपए देने की घोषणा कर दी। एक परिवार आगे आया तो उसे देख दूसरा, फिर तीसरा और यह एक परम्परा बन गई। निर्णय लिया गया कि आज के बाद गांव में पगड़ी रस्म में यथाशक्ति गांव के स्कूल के लिए राशि भेंट की जाएगी। यह किसी पर थोपी नहीं, बल्कि इसमें हर समाज अपने हिसाब से राशि दान करता है।

 

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सबसे पहले स्कूल में बिजली आई
माध्यमिक विद्यालय के एचएम आबिद अली मंसूरी ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय की दशा सुधर रही है। छात्रों को गर्मी में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। पहले विद्यालय के शिक्षकों ने राशि मिलाकर विद्यालय को संवारने का प्रयास किया था, मगर पैसों की कमी के चलते संपूर्ण कार्य नहीं हो सकता था। इसके बाद ग्रामीणों के निर्णय के चलते न सिर्फ स्कूल में बिजली की लाइन डली, बल्कि पंखे लग गए व दूसरे साधन भी जुटने लगे। अब स्कूल में आरओ का पानी आता है, पहले पानी की टंकी भी नहीं थी।

 

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बच्चे प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ेंगे
शिक्षक मुकेश नागर ने बताया कि बिजली व्यवस्था के बाद बच्चों को कम्प्यूटर व प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों से ये साधन भी मिल गए हैं। इसके अलावा दूसरे संसाधन भी जुटाए गए हैं। सभी का प्रयास है कि सरकारी स्कूल में बच्चों को निजी स्कूल से अच्छी सुविधाएं मुहैया कराई जाए।
जैसे ही नान्द्रा गांव के सरकारी स्कूल की हालत में आमूल-चूल परिवर्तन आया, बच्चे अच्छी संख्या में आने लगे हैं। यही नहीं अब यहां पर आसपास के गांवों से भी पढ़ाई के लिए छात्र-छात्रा आने लगे हैं।

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