बिना संशोधन सरकार ने बंद किया पूरा डिनोमिनेशन

500 और 1000 के नोट बंद करने के मामले में टीपीए का सेमिनार

By: Narendra Hazare

Published: 10 Nov 2016, 11:37 PM IST



इंदौर. एसबीआई के पूर्व डायरेक्टर और सीए अनिल गर्ग ने कहा, आरबीआई एक्ट की धारा 26-2 के तहत नोटिफिकेशन नंबर एसओ3407(ई) जारी किया गया है, जिसके तहत किसी एक डिनोमिनेशन (मूल्यवर्ग) की एक या सीरीज को बंद किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान में पूरी सीरीज को बंद किया गया है, जिसकी वैधानिकता पर दो राय हो सकती हैं। सन 1956 में पूरी डिनोमिनेशन को बंद करने के लिए आरबीआई एक्ट में धारा 26-ए का समावेश किया गया था, लेकिन वर्तमान में एेसा कोई संशोधन नहीं हुआ है। गुरुवार को गर्ग 500 और 1000 के नोट बंद करने के मामले में टीपीए की ओर से आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।

आयकर भवन में उन्होंने कहा, 8 नवंबर तक किसी व्यापारी या पेशेवर की लेखा पुस्तकों के अनुसार दर्शाई गई नकद राशि को उसके द्वारा एकमुश्त या अलग-अलग किस्तों में उसके बैंक खाते में जमा कराया जाता है तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगता है। चाहे जमा की गई राशि कितनी भी क्यों न हो। सीए राजेश मेहता ने कहा, 8 नवंबर के बाद की बिक्री और प्राप्ति 500 और 1000 के पूर्व में प्रचलित नोटों से नहीं की जा सकती। सीए मनोज गुप्ता ने कहा, यदि कोई व्यक्ति अपने स्टाफ के खाते में नकदी जमा करता है और उसका गलत फायदा उठाना चाहता है तो बेनामी एक्ट के तहत बेनामीदार को 7 वर्ष का कारावास हो सकता है। सीए राजेंद्र गोयल ने कहा, बैंकों में पैसा जमा होने से बाजार में व्यापार बढ़ेगा। सीए मनोज डाफरिया ने कहा, यदि कोई गृहिणी बचत की राशि कर सलाहकार को बताए बिना बैंक में जमा करती है और इसकी जानकारी बाद में मिलती है तो उसे चालू वित्तीय वर्ष की आय मानते हुए 30 प्रतिशत कर का भुगतान किया जाना उचित होगा। टीपीए अध्यक्ष अनिल खंडेलवाल ने कहा, करदाता उपलब्ध बैंक में जमा कराएं। इस मौके पर एडवोकेट राजेश जोशी, एसएस देशपांडे, जीबी अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल और पीडी नागर समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

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