इंदौर में मेट्रो दौड़ाने के लिए धार ने चुकाई कीमत

इंदौर में मेट्रो दौड़ाने के लिए धार ने चुकाई कीमत

Mohit Panchal | Publish: Jul, 14 2018 11:10:37 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

छोटा बांगड़दा में वन विभाग की जमीन पर बनेगा डिपो, बदले में बदनावर के शेरगढ़ में वन विभाग को दी जगह

इंदौर। एक दशक से कागजों में दौड़ रही मेट्रो ट्रेन को दिल्ली सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अचानक गति मिल गई। डिपो के लिए दो साल से छोटा बांगड़दा की जमीन दिए देने का प्रयास था, लेकिन वन विभाग ने अड़ंगा लगा रखा था। अब रास्ता साफ हो गया, क्योंकि धार प्रशासन ने वन विभाग को बदले में उतनी जमीन बदनावर के शेरगढ़ में दे दी।
इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाए जाने का सपना एक दशक से दिखाया जा रहा है। उसके बाद जयपुर में प्रस्ताव बना और दो साल पहले ट्रेन दौड़ भी गई। इंदौर में ये काम कछुआ चाल से हो रहा था। पिछले दिनों जब केंद्र सरकार की ओर से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई तो अचानक काम में गति आ गई।

मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कंपनी लिमिडेट के लिए सबसे पहली आवश्यकता थी, डिपो के लिए जमीन। प्रबंधन ने छोटा बांगड़दा के सर्वे नंबर २७७ की ३०.१७८ हैक्टयर जमीन डिपो के लिए पसंद की थी।जिला प्रशासन से उक्त जमीन की मांग को लेकर प्रस्ताव भी भेज दिया, लेकिन पेंच वन विभाग का फंसा हुआ था।

इस जमीन का आवंटन वन विभाग की अनापत्ति व अनुमति के बगैर नहीं हो सकता था। इस पर जिला प्रशासन ने वन विभाग दिल्ली से अनुमति ली, तब तय हुआ कि उसके बदले सरकार उन्हें वन के लिए उतनी ही जमीन कहीं ओर देगा। इस मामले को संभागायुक्त ने गंभीरता से लेकर धार कलेक्टर को वन से जुड़ी राजस्व की सरकारी जमीन तलाशने के निर्देश दिए थे।

जमीन की खोज पूरी हो गई। धार कलेक्टर दीपक सिंह ने शेरगढ़ की सरकारी जमीन खसरा नंबर ७ की २४.७२६ में से १२.३४५ और खसरा नंबर ८५७ की १७.८३३ हेैक्टेयर कुल ३०.१७८ हैक्टेयर जमीन वन विभाग को देने की मंजूरी दे दी। बकायदा जमीन का आवंटन शर्तों के आधार पर कर दिया गया।

ये हैं शर्तें
- राजस्व विभाग की उक्त जमीन के बदले वन विभाग की जमीन इंदौर जिले की प्रभावित वन भूमि नियमानुसार मेट्रो ट्रेन परियोजना को डिपो निर्माण के लिए जल्द उपलब्ध कराई जाए।
- परियोजना द्वारा वन विभाग की जमीन का उपयोग पांच वर्ष के भीतर नहीं किया जाता है तो राजस्व विभाग की आवंटित जमीन का आदेश स्वमेव निरस्त माना जाकर राजस्व अभिलेख में दर्ज की जाएगी।
- वन विभाग की जमीन ३०.१७८ हैक्टेयर से जितनी कम जमीन परियोजना के लिए उपयोग में लाई जाती है, उतनी जमीन वन विभाग को हस्तांतरित की जाना मान्य होगा। संबंधित परियोजना के समक्ष प्राधिकारी द्वारा न्यायालय को अवगत कराया जाएगा।

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