ऑटो उपकरण कारोबार में दस फीसदी की गिरावट, एक लाख लोगों की गई नौकरी

  • एक साल में ऑटो उपकरण कारोबार को हुआ 20,187 करोड़ रुपए का नुकसान
  • मंदी की वजह से इस वर्ष जुलाई तक एक लाख लोगों ने खोया अपना रोजगार
  • 2019-20 की पहली छमाही में कारोबार में 10.1 फीसदी की गिरावट आई

नई दिल्ली। देश के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ( automobile industry ) में पिछले एक साल से छाई सुस्ती के कारण ऑटो उपकरण कारोबार ( Auto Equipment Business ) में 2019-20 की पहली छमाही में 10.1 फीसदी की गिरावट आई और यह पिछले साल की इसी अवधि के 199849 करोड़ रुपए से घटकर 179662 करोड़ रुपए रह गया। यानी एक साल में इंडस्ट्री को 20,187 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया है।

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एक लाख गई नौकरियां
भारतीय ऑटोमोटिव कम्पोनेंट निर्माता संघ ( Indian Automotive Component Manufacturers Association ) के अध्यक्ष दीपक जैन और महानिदेशक विन्नी मेहता ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में उद्योग के प्रदर्शन की जानकारी देते हुए कहा कि मंदी की वजह से इस वर्ष जुलाई तक एक लाख लोगों के रोजगार गए। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब ऑटो उपकरण उद्योग के कारोबार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जैन ने उद्योग के कारोबार में गिरावट के कारण गिनाते हुए कहा वाहनों की मांग में कमी बीएस-4 से बीएस-6 वाहनों के निर्माण के लिए हालिया निवेश, तरलता की तंगी और इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति को लेकर संशय के अलावा अन्य कारणों की वजह से वाहन उपकरण क्षेत्र की विस्तार योजनाओं पर असर पड़ा।

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देश की जीडीपी में रखता है योगदान
देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो फीसदी से अधिक का योगदान और पचास लाख लोगों को रोजगार देने वाले उद्योग की दीर्घकालिक आधार पर निरंतर गति बनाए रखने के लिए जैन ने ऑटो उपकरण पर एक समान 18 फीसदी का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) किए जाने की सरकार से मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 60 फीसदी ऑटो उपकरण पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है जबकि शेष 40 फीसदी जिसमें मुख्यत: दुपहिया और ट्रैक्टर उपकरण है 28 फीसदी जीएसटी है।

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जीएसटी ज्यादा हाने से ग्रे बाजार को मिलता है बढ़ावा
उन्होंने कहा कि दुपहिया और ट्रैक्टर उपकरणों पर अधिक जीएसटी होने से ग्रे बाजार को बढ़ावा मिलता है। सभी उपकरणों पर 18 फीसदी जीएसटी कर दिए जाने से वाहन बिक्री के बाद ग्राहकों को गुणवत्ता वाले उपकरण तो मिलेंगे ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। इसके अलावा निवेश के लिहाज से मध्यम एवं लघु उद्योगों की परिभाषा में भी बदलाव की जरूरत है।

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निर्यात हुआ कम
मेहता ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऑटो उपकरणों का निर्यात 2.7 फीसदी बढ़कर पहले के 50034 करोड़ रुपए से 51397 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यूरोप को सर्वाधिक 32 फीसदी निर्यात किया गया जबकि इसके बाद नार्थ अमेरिका और एशिया क्रमश 30 और 26 प्रतिशत रहे। इस दौरान आयात 6.7 फीसदी घटकर 61686 करोड़ रुपए से 57574 करोड़ रुपए रह गया। आयात मुख्यत: 62 फीसदी एशिया से रहा। यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से आयात क्रमश: 28 और आठ फीसदी रहा।

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उपकरणों की बिक्री के कारोबार में चार फीसदी
वाहन बिक्री के बाद उपकरणों की बिक्री के कारोबार में चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 33746 करोड़ रुपए से 35096 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। जैन ने कहा कि देश के ऑटो मोबाइल क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की अर्थव्यवस्था को 50 खराब डालर बनाने में अहम योगदान कर सकता है।

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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