राजस्थान के पशुपालक गोमूत्र से कर रहे हैं लाखों की कमार्इ, आपके पास भी है मौका

बाजार में गाेमूत्र की डिमांड इतनी अधिक है कि डेयरी किसान इसे 15 से 20 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं।

By: Ashutosh Verma

Published: 24 Jul 2018, 02:42 PM IST

नर्इ दिल्ली। गाय का सिर्फ दूध ही नहीं बल्कि गाेमूत्र से भी पशुपालको की बड़ी कमार्इ हो रही है। देश के कर्इ राज्यों के डेयरी किसान गाेमूत्र से मोटी कमार्इ कर रहे है। बाजार में गाेमूत्र की डिमांड इतनी अधिक है कि डेयरी किसान इसे 15 से 20 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ गाय के दूध की कीमत 22 से 25 रुपये प्रति लीटर है। उंची नस्ल की गायों में राजस्थान की गिर आैर थारपारकर के मूत्र की सबसे अधिक डिमांड है।


दूध बेचने के आलावा गोमूत्र से होती है 30 फीसदी अधिक कमार्इ
राजस्थान के जयपुर के कैलाश गुज्जर ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि, जैविक खेती करने वालों को वो गाेमूत्र बेचते हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी कमार्इ में 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। दरअलस जैविक खेती मे गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं इसके आलावा गाेमूत्र को दवाइयों आैर धार्मिक कामों में भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इसके गाेमूत्र को इकट्ठा करने के लिए पशुपालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कैलाश गुज्जर का कहना है कि उन्हें गोमूत्र एकत्र करने के लिए रातभर जागना पड़ जाता है ताकि ये गोमूत्र कहीं जमीन पर न गिर जाए।

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यहां होती है सबसे अधिक बिक्री
उदयपुर के महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी आॅफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नाेलाॅजी जैविक खेती के लिए हर माह 300 से 500 के गाेमूत्र का इस्तेमाल करता है। इसके लिए यूनिवर्सिटी राजस्थान के कर्इ पशुपालकों से गोमूत्र की खरीदारी करता है। यूनिवर्सिटी ये गोमूत्र हर माह 15,000 से 20,000 रुपये में खरीदता है। मौजूदा समय में पूरे राजस्थान में कुल 2,562 राज्यों द्वारा संचालित शेल्टर्स में करीब 8,58,960 गायें हैं।


पतंजलि के उत्पादों में होता है गोमूत्र का प्रयोग
पतंजलि आयुर्वेद प्रति दिन करीब 20 टन तक गोनाइल बनाता है जिसमें गाेमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद भी पतंजलि आयु्र्वेद गोनाइल के डिमांड को पूरा नहीं कर पाता है। सिर्फ गोनाइल ही नहीं बल्कि पतंजलि के कर्इ प्रोडक्ट में गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है। बात दें कि कर्इ डाॅक्टर गाेमूत्र से दवांए बनाने का पेटेंट भी रखते हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में रहने वाले डाॅ विरेन्द्र कुमार जैन भी इनमें से एक हैं जो गोमूत्र से हर्बल दवाएं बनाते हैं। पिछले दो दशक में जैन सेंटर ने गोमूत्र से बनने वाले करीब 12 लाख पेटेंट पर काम किया है। इनमें से कई तो कैंसर जैसी घातक बीमारियों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

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