HOUSING FINANCE कंपनियों के लिए नए नियम बनाने की तैयारी, RBI ने पार्टियों से मांगी राय

  • हाउसिंग फाइनेंसिंग के बदल सकते हैं रूल्स
  • पहले से सख्त रूल्स लाएगी RBI
  • पर्सातव जारी कर मांगी राय

By: Pragati Bajpai

Updated: 18 Jun 2020, 09:26 PM IST

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ( rbi ) हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर सख्त होने वाली है। reserve bank of india ने प्रस्ताव जारी कर Housing finance companies के नियमों में बदलाव ( HOUSING FINANCE RULES CHANGED ) की बात कही है । केंद्रीय बैंक डबल फाइनेंसिंग ( DOUBLE FINANCING )की समस्या को समाप्त करने के लिए एचएफसी या तो ग्रुप कंपनी के रियल बिजनेस को कर्ज दे सकते हैं या ग्रुप कंपनी के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के रिटेल ग्राहकों को लोन दे सकते हैं. वे दोनों को लोन नहीं दे सकते है।

बदल जाएगी हाउसिंग फाइनेंस की परिभाषा-

बैंक के इस कदम से हाउसिंग फाइनेंस की परिभाषा बदल सकती है। हाउसिंग फाइनेंस के तहत आवासीय इकाई, स्कूल और हॉस्पिटल के लिए बिल्डर को दिये जाने वाले लोन भी शामिल है। ड्राफ्ट में संपत्ति को गिरवी रखकर दिए गए लोन को इस परिभाषा से बाहर रखा जाएगा। केंद्रीय बैंक के ड्राफ्ट रेगुलेशन में कहा गया है कि Housing finance companies अपने कुल फंड के 15 फीसदी से ज्यादा एक्पोजर नहीं कर सकती है। ग्रुप की सभी कंपनियों में यह एक्सपोजर 25 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता है।

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इसके साथ ही आरबीआई के नए नियम के मुताबिक एचएफसी ( HFCs ) के नेट असेट्स का कम से कम 50 प्रतिशत "हाउसिंग फाइनेंस" होना चाहिए। इसमें इंडिविजुअल लोन पोर्टफोलियो बनाने के लिए कंपनियों को चार साल के समय का सुझाव दिया गया था। यह हाउसिंग फाइनेंस बुक का कम से 75 प्रतिशत होगा। अगर कंपनी इसमें फेल होती है तो एचएफसी को एनबीएफसी-निवेश और क्रेडिट कंपनियों (nbfc) के रूप में माना जाएगा।

इसके अलावा RBI ने मौजूदा होम लोन कर्जदाताओं को दो साल में अपने न्यूनतम ओनरशिप वाले फंड को दोगुना कर 20 करोड़ रुपए करने की जरूरत होगी। बैंक का मानना है ऐसा करने से कंपनी की कैपिटल बेस मजबूत होगी।

RBI ने एचएफसी का रेगुलेशन NATIONAL HOUSING BANK से अपने हाथ में ले लिया था। इसलिए यह अंदाजा पहले से था कि एचएफसी पर लागू मौजूदा नियमों की समीक्षा होगी। लेकिन बात यही पर खत्म नहीं हो जाती बल्कि आधार हाउसिंग फाइनेंस ( Aadhar Housing Finance ltd ) के एमडी देव शंकर त्रिपाठी ने इन प्रस्तावों में लिस्टेड शेयरों की जमानत के बदले में कर्ज देने से संबंधित नियमों का भी पालन को जोड़ने की बात कही है।

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