रियल एस्टेट को बजट से काफी उम्मीदें, अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर जीएसटी कम करने की मांग

कोरोना संकट से रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर न सिर्फ रियल एस्टेट बल्कि इससे जुड़े 200 से अधिक सेक्टर पर हुआ है।

By: Saurabh Sharma

Updated: 17 Jan 2021, 11:22 AM IST

नई दिल्ली। कोरोना संकट से रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर न सिर्फ रियल एस्टेट बल्कि इससे जुड़े 200 से अधिक सेक्टर पर हुआ है। प्रॉपर्टी बाजार और इससे जुड़े सेक्टर में सुस्ती का असर देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार पर हुआ है। इस संकट से उबारने के वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण को बड़े कदम उठाने होंगे। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रियल एस्टेट से जुड़े लोगों की ओर से बजट से किस तरह की उम्मीदें हैं।

इन डिमांड पर किया जाए गौर
अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी के अनुसार अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर अभी 5 फीसदी जीएसटी लगता है। कुछ महीनों के लिए अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों पर दरें 0 फीसदी करना चाहिए। इसके साथ ही होम लोन की मूल राशि के भुगतान पर अलग से छूट घर खरीदारों को दिया जाए। साथ ही होम लोन के पेमेंट पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत मिलने वाली कर छूट की सीमा को भी बढ़े।

होम लोन और व्यक्तिगत आय पर कर राहत मिले
मौजूदा समय में आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये की आयकर छूट मिलती है। इससे अब बढ़ाने का वक्त आ गया है। इस फैसले से अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावे देने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही धारा 80 सी के तहत कटौती की सीमा 1.5 लाख रुपये में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। 2014 से अभी तक इसमें बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही कंपनी कर कटौती के बाद व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा बढ़ाने की जरूरत है। इन कदमों से आम आदमी के हाथ में अधिक पैसा आएगा। वह इसका इस्तेमाल अपने बड़े सपने जैसे घर या कार की खरीदारी में करेगा। इससे अर्थव्यवस्था को तेज करने में मदद मिलेगी।

सस्ते घर खरीदारों को रियायत मिले
बजट में 50 लाख रुपए तक के सस्ते घरों के लिए होम लोन के लिए लोन टू वैल्यू (एलटीवी) अनुपात को बढ़ाकर 90 फीसदी करना चाहिए। साथ ही इसका लाभ एमआईजी और एचआईजी को भी देना चाहिए। आयकर कटौती के लिए होम लोन पर ब्याज की अनुमति, घर खरीदारों को प्रोत्साहित करने के लिए 2 लाख रुपए के आवास ऋण पर आईटी अधिनियम 1961 की धारा 24 के तहत वर्तमान ब्याज कटौती को हटा दिया जाना चाहिए।

फंड की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो
रियल एस्टेट की मदद के लिए 25000 करोड़ रुपये के लिए स्ट्रेस फंड सरकार ने दिया है। हालांकि, इस तरह के और अधिक स्ट्रेस फंडों को अनुमति देने से देशभर में अटकी परियोजनाओं का काम पूरा करने आसान होगा। वहीं, घर खरीदारों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए सबवेंशन स्कीम पर प्रतिबंध हटाने पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।

निवेशकों को मिले रियायत
भारत में रियल एस्टेट में सेक्टर में विदेशी निवेशकों को अधिक से अधिक आकर्षित करने की जरूरत है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की जरूरत है जहां निवेशकों को प्रोत्साहन मिले, जिससे अधिक से अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इसके लिए नियम को सरल बनाने की जरूरत है। इसके लिए रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा देने की जरूरत है। इससे पूरे सेक्टर की हालत को बदल सकती है, क्योंकि इससे कम दरों पर फंड्स प्राप्त करने में मदद मिलेगी और सेक्टर के प्रत्येक हिस्से को लाभ होगा। इससे इस सेक्टर में निवेश भी बढ़ेगा।

होम लोन, किराए और आयकर पर छूट बढ़े
रियल्टी सेक्टर में सुस्ती खत्म हो इसके लिए जरूरी है कि घर खरीदरों को सरकार का बढ़ावा मिले। यह तभी हो सकता है जब सरकार होम लोन, किराए और आयकर छूट की सीमा पर मिल रहे रियायतों को बढ़ाएगी। इससे आम लोगों के पास बचत बढ़ेगा और वह अपने घर के सपने को पूरा कर पाएंगे। इसके अलावा इस सेक्टर को उद्योग का दर्जा दिया जाए। इससे डेवलपर्स के लिए कम ब्याज दर पर फंड जुटाना आसान हो जाएगा। ज्यादातर लोग हाउसिंग लोन लेकर घर खरीदते हैं, और इस लोन को अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई से चुकाते हैं। होम लोन की मूल राशि और ब्याज पर ज्यादा छूट मिलने से लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ेगी जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और इकोनॉमी को भी फायदा देगा।

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