टेलिकॉम कंपनियों की बढ़ी मुश्किल से कटेगी आपकी जेब, इस साल 30% तक बढ़ेगा मोबाइल बिल

दौर में बने रहने के लिए टेलिकॉम कंपनियां ग्राहकों पर बोझ डालने की तैयारी में हैं।

वोडाफोन-आइडिया ( Vodafone Idea ) , Bharti Airtel जैसी प्रमुख कंपनियों की हालत नाजुक

नई दिल्ली। टेलिकॉम कंपनियों के बढ़ते घाटे, एजीआर ( AGR ) की मोटी फीस और कंपनियों के खराब तिमाही नतीजों के चलते देश की प्रमुख टेलिकॉम कंपमनियों की हालत खस्ता हो चुकी है। लेकिन दौर में बने रहने के लिए अब ये कंपनियां ग्राहकों पर बोझ डालने की तैयारी में हैं। वोडाफोन-आइडिया ( Vodafone Idea ) , भारतीय एयरटेल ( Bharti Airtel ) जैसी प्रमुख कंपनियों को एजीआर की बकाया रकम के तौर पर मोटी रकम चुकानी है।

इसलिए बढेगा खर्च

आपको बता दें कि देश की प्रमुख कंपनियों का ऐवरेज रेवेन्यू पर यूजर ( ARPU ) में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि टेलिकॉम सर्विसेज पर सब्सक्राइबर्स का कुल खर्च अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में काफी कम है। जिसके चलते कंपनियों को घाटा उठाना पड़ रहा है। इसलिए ये कंपनियां टैरिफ में बढ़ोतरी कर बढते घाटे को कम करना चाह रही है। टेलिकॉम इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक कंपनियां टैरिफ में 30 फीसदी तक बढोतरी कर सकती हैं।

भारी घाटे से जूझ रही है वोडाफोन-आइडिया

देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया भारी घाटे से जूझ रही है। आलम यह है कि कंपनी के चैयरमैन खुद ही कह चुके हैं कि अगर सरकार ने उनकी मदद नहीं की तो उन्हें टेलिकॉम कारोबार को बंद करना पड़ेगा।

भारती एयरटेल पर भारी बोझ

देश की दूसरी प्रमुख कंपनी एयरटेल का भी हाल कमोवेश यही है। कंपनी को एजीआर के तौर पर भारी रकम चुकानी है। वहीं एयरटेल का पिछला तिमाही घाटा भी भारी भरकम रहा है। जिसके चलते कंपनी नए ऑफर्स और डिस्काउंट पर काफी सोच समझ कर कदम उठा रही है।

ग्राहको का बढ़ेगा बिल

अगर आप मोबाइल फोन पर इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो आपने गौर किया है कि आपके इंटरनेट की स्पीड भी इन दिनों काफी घटी है। क्योंकि पहले जो कंपनियों ने अनलिमिडेट ऑफर्स की पेशकश की थी, उसपर कंपनी को मौजूदा रकम में ग्राहकों को इतना फायदा देना भारी पड़ रहा है। लिहाजा अब कंपनियों के पास टैरिफ बढ़ाने के अलावा कोई चारा नही बचा है। आपको बता दें कि वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और रिलायंस जियो ने पिछले वर्ष के अंत में प्रीपेड टैरिफ 14-33 पर्सेंट बढ़ाया था जो तीन वर्षों में इसमें पहली बढ़ोतरी थी। लेकिन उसके बाद भी कंपनियां अपना खर्च निकालने में सक्षम नही हो पा रही है।

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