ढाई सौ करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर भारी लापरवाही

जबलपुर के मेडिकल कॉलेज के तीन आधुनिक अस्पतालों के भवन अभी तक नहीं हो सके तैयार, एमबीबीएस की सौ नई सीटें फंसी, सांस और कैंसर रोगियों की नई सुविधा में देर हो रही

 

 

By: shyam bihari

Published: 04 Oct 2021, 07:05 PM IST

 

जबलपुर। कैंसर, श्वास सहित अन्य गम्भीर बीमारियों के पीडि़तों को जबलपुर शहर के लोक निर्माण विभाग के प्लानिंग इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआइयू) की लापरवाही के कारण सुपर स्पेशलिटी उपचार नहीं मिल पा रहा। राज्य सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (एनएससीबीएमसी) में लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए से तीन आधुनिक अस्पताल बनाने के निर्देश दिए थे। तीनों प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में निर्माण एजेंसी ने ढिलाई बरती। इसमें एक भी बिल्ंिडग समय पर बनाकर एनएससीबीएमसी को हैंडओवर नहीं कर सकी। डेडलाइन बढ़ाने के बाद भी सभी कार्य पूरा करने की मियाद पिछले साल समाप्त हो चुकी है। उसके बावजूद भवनों का कार्य अधूरा है। बिल्ंिडग बनाने में जिम्मेदारों की लापरवाही से एमबीबीएस के छात्रों की सौ नई सीटों की स्वीकृति अटकी हैं। नए बिस्तर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। नई मशीनों की स्थापना, आधुनिक जांच सुविधा से लेकर गम्भीर मरीजों के उपचार की व्यवस्था में देर हो रही है।

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी मेडिसिन

- 2013 में योजना पर काम शुरू।
- 2014 में भवन निर्माण शुरू।
- 26 करोड़ रुपए लागत की योजना।
- 06 करोड़ रुपए से पहला चरण पूरा।
- 20 करोड़ रुपए से दूसरे चरण में काम।
- 11 करोड़ रुपए से इसमें भवन निर्माणाधीन।
ये भवन सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के बाजू में बन रहा है। भूतल सहित पांच मंजिला भवन में मरीजों के लिए कुल 90 बिस्तर होंगे। इसमें 10-10 आइसीयू और एचडीयू बेड होंगे। लगभग सात करोड़ रुपए से आधुनिक जांच मशीनें व अन्य संसाधन जुटाए जाएंगे। पलमोनरी मेडिसिन में एमडी की सीटें बढ़कर 13 हो जाएंगी। सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई के लिए डीएम कोर्स भी शुरूहोगा। लेकिन, भवन अधूरा होने से सभी कार्ययोजना अटक गई है। निर्माण कार्य पूरा करने की डेडलाइन बढ़ाकर पिछले साल मार्च, 2020 की गई थी।

स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट
- 2014 में प्रोजेक्ट शुरू
- 2016 में भवन निर्माण शुरू
- 135 करोड़ रुपए की योजना
- 50 करोड़ रुपए से भवन निर्माण
- 85 करोड़ रुपए से अन्य संसाधन
- 2018 से उपचार शुरूहोना था

ये भवन वर्तमान कैंसर हॉस्पिटल के पीछे बन रहा है। योजना में केंद्र सरकार की 60 और राज्य सरकार की 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इसके भवन में कुल 200 बिस्तर मरीजों के लिए होंगे। इसमें 40 आइसीयू बेड शामिल हैं। 250 चिकित्सकीय एवं अन्य पद हैं। इसमें कैंसर विशेषज्ञों की नियुक्तियां होगी। लीनियर एक्सेलेटर मशीन लगेगी। रेडियोथैरेपी जैसा उपचार मिलेगा। कैंसर के गंभीर मरीजों की आधुनिक जांच, उपचार, थैरेपी एवं सर्जरी की सुविधा रहेगी। शोध का अवसर बढ़ेगा। ये भवन तीन साल की देर से बनकर लगभग तैयार है। लेकिन, अभी तक बिल्ंिडग हैंडओवर नहीं हुई।

मेडिकल अस्पताल एक्सटेंशन
- 2015 में प्रोजेक्ट शुरू
- 2017 में निर्माण कार्य शुरू
- 106 करोड़ रुपए की योजना
- 07 अलग-अलग भवन बनना है
- 01 कंपनी ने काम बीच में छोड़ा
- 2019 से पढ़ाई-उपचार शुरू होना था

ये भवन वर्तमान में मेडिकल अस्पताल के पीछे बन रहा है। नई ओपीडी, टीचिंग कॉम्पलेक्स, ऑपरेशन थिएटर सहित मरीजों को भर्ती करने के लिए नए वार्ड बनाया जाना है। इस योजना में शामिल हॉस्टल भवनों का निर्माण हो चुका है। अस्पताल की एक्सटेंशन बिल्ंिडग के बनने से मरीजों के लिए 300 नए बिस्तर बढ़ जाएंगे। आधुनिक ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध होंगे। इस अधोरसंचना के बनने से एमबीबीएस की सौ नई सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। निर्माण कार्य की डेडलाइन बढ़कर जुलाई, 2020 की गई थी। एक साल बाद भी अस्पताल एक्सटेंशन भवन का काम अधूरा है।
एम्स जैसा उपचार
स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी मेडिसिन के अंतर्गत प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक मात्र आधुनिक भवन शहर में बन रहा है। इसमें डीएम की पढ़ाई की सुविधा के साथ ही भविष्य में एम्स जैसी उपचार सुविधाएं मुहैया कराने का प्रस्ताव है। कैंसर के उपचार के लिए प्रदेश स्तर पर सबसे बड़ा संस्थान तैयार किया जा रहा है। इसे स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट नाम दिया गया है। अंचल में बड़ी संख्या में कैंसर के मरीज उपचार के लिए शहर आते है। इंस्टीट्यूट में प्रस्तावित सुविधाओं के उपलब्ध होने से शहर और आसपास के जिलों के मरीजों को मुंबई, दिल्ली, भोपाल, नागपुर तक नहीं दौडऩा पड़ेगा। मेडिकल अस्पताल के भवन के विस्तार से मरीजों को उपचार के साथ ही छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के अवसर बढ़ेंगे। कॉलेज में मौजूदा अधोसंरचना पर अभी एमबीबीएस की डेढ़ सौ सीटें है। एक्सटेंशन भवन के बनने से एमबीबीएस की सौ अतिरिक्तसीटों के लिए जरुरी अधोसंरचना मिल जाएगी। इससे कॉलेज में एमबीबीएस सीटें ढाई सौ हो जाएंगी।

पीएस से लेकर आयुक्तकी चेतावनी बेअसर

मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सम्बंधी सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक इन निर्माण कार्यों के सम्बंध में चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव से लेकर आयुक्ततक को जानकारी है। स्वास्थ्य योजनाओं पर निगरानी करने वाले सभी अधिकारियों को लेटलतीफी की जानकारी है। हर बार निरीक्षण करते वक्त पर अधिकारी डेडलाइन की पालना के लिए निर्माण एजेंसी को चेतावनी दे रहे है। लेकिन, अधिकारियों के निरीक्षण से लौटते ही चेतावनी बेअसर हो जाती है।

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