मप्र में फसल के नुकसान पर है 4 लाख रुपए देने की व्यवस्था, कोरोना पीडि़तों को नहीं

मप्र में फसल के नुकसान पर है 4 लाख रुपए देने की व्यवस्था, कोरोना पीडि़तों को नहीं

By: Lalit kostha

Published: 27 Jun 2021, 02:11 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि मप्र राजस्व पुस्तिका के सर्कुलर 6 (4) के तहत प्राकृतिक आपदा में नष्ट हुई फसल के लिए किसानों को 4 लाख रुपए अनुदान राशि देने का प्रावधान है। कोरोना महामारी के चलते काल के गाल में समाने वालों के परिजनों के लिए यह प्रावधान नहीं है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए एक जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा, याचिका की निराकृत

बालाघाट जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष शेषराव लोचनलाल राहंगडाले की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने कोर्ट को बताया कि कोरोना महामारी के चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

उन्होंने तर्क दिया कि मध्य प्रदेश भू राजस्व पुस्तिका के 2014 में जारी सर्कुलर 6(4) के तहत प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौत पर परिजनों को चार लाख रुपए क्षतिपूर्ति दिए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से किसी को भी मुआवजे की रकम नहीं दी गई। यह रकम पीडि़तों के परिजनों को प्रदान करने का निर्देश जारी किया जाए। यह भी कहा गया कि सरकार कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ें छुपा रही है। सरकार को सही आंकड़ें उजागर करने के निर्देश दिए जाए।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके कौरव व उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने याचिका का विरोध किया। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि ये प्रावधान प्राकृतिक आपदा के चलते फसल नष्ट होने पर किसान को मुआवजा प्रदान करने के लिए है। वहीं यह भी कहा गया कि कोरोना वायरस के चलते हुई मौतों के आंकड़ों का मामला एक अन्य याचिका में हाईकोर्ट के समक्ष उठाया गया है। जिस पर कोर्ट विचार कर रही है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि एक अन्य याचिका में कोरोना से मृत्यु पर मुआवजे का मुद्दा उठाया गया था। जिसे वापस ले लिया गया है। वहीं कोरोना वायरस से मौतों के आंकड़े का मसला हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है। इस पर अलग से विचार की आवश्यकता नहीं है। यह कहकर कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।

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