चार साल की विकलांग बच्ची से युवक ने बलात्कार, जबलपुर में हुई वारदात

चार साल की विकलांग बच्ची से युवक ने बलात्कार, दरगाह परिसर में हुई वारदात

 

जबलपुर। बोलने व चलने-फिरने में असमर्थ चार साल की मासूम बच्ची को अपनी हैवानियत का शिकार बनाने वाला अब जीवनभर जेल की सलाखों के पीछे चक्की पीसेगा। जिला अदालत ने कहा कि जिन परिस्थितियों में आरोपित ने
पीडि़त से दुष्कर्म किया, वह कतई रियायत का पात्र नहीं है। एससीएसटी एट्रोसिटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश वीपी सिंह ने घमापुर, जबलपुर निवासी आरोपित रवि मसीह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वारदात हाईकोर्ट के सामने स्थित कचहरी वाले बाबा की दरगाह के प्रांगण में हुई थी।

जीवनभर जेल में रहेगा चार साल की दिव्यांग बच्ची से हैवानियत करने वाला

जिला अदालत ने सुनाई सजा, बीस हजार रुपए जुर्माना लगाया

स्टेशन गई थी मां-
अभियोजन के अनुसार आरोपित रवि मसीह पीडि़त बच्ची के पिता के साथ क्षेत्र की ही एक होटल में काम करता था। पीडि़त बच्ची की मां कचहरी वाले बाबा की दरगाह में भीख मांगकर गुजर-बसर करती थी। बच्ची दिव्यांग थी, न तो बोल सकती थी, ना ही चल फिर सकती थी। आरोपित रवि भी दरगाह परिसर में ही रहता था। 23 मई 2017 को रात्रि 8 से 9 बजे के बीच आरोपित पीडि़त बच्ची की मां के पास शराब पीकर आया। उस समय बच्ची दरगाह के सामने झाड़ के नीचे सो रही थी। बच्ची की मां ने आरोपित को बताया कि उसका पति रीवा गया है, 9 बजे तक आ जाएगा। यह कहकर वह स्टेशन चली गई। रास्ते में मिले अपने भाई को भी उसने साथ ले लिया। करीब आधा घंटे बाद वह वापस आई तो देखा कि बच्ची सो रही थी, रवि भी पास ही बैठा था।

 

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रात करीब 10 बजे पीडि़त बच्ची का पिता रीवा से वापस आया। उसने बच्ची को गोद में उठाया तो उसे शंका हुआ। देखने पर बच्ची के कपड़े लहूलुहान पाए गए। पूछने पर आरोपित ने स्वयं पीडिता की मां से कहा कि उसने बच्ची से दुष्कर्म किया था। इस पर ओमती थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपित ने कड़ी पूछताछ में शराब के नशे में दुष्कर्म की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने धारा 376 (2) व लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत अपराध कायम किया। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देकर सजा व जुर्माने से दंडित किया।

मां को मिलेगी जुर्माने की राशि
कोर्ट ने आरोपित पर 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। निर्देश दिए गए कि यह राशि प्रतिकर के रूप में पीडिता की मां को दी जाए।

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Lalit kostha Desk
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