भ्रष्ट बैंक अधिकारी को कुल 49 साल की जेल

सीबीआई कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में सुनाई सजा

By: shivmangal singh

Published: 07 Mar 2020, 11:21 PM IST

जबलपुर . सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके चौबे की कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े अलग-अलग मामलों में इलाहाबाद बैंक के बर्खास्त अधिकारी को विभिन्न धाराओं के तहत 49 वर्ष की सजा से दंडित किया। कोर्ट ने दोषी अधिकारी पर 19 लाख का जुर्माना लगाया। आरोपी को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई गई है। दोषी अधिकारी को अधिकतम सजा 10 वर्ष भुगतनी पड़ेगी। इलाहाबाद बैंक, राइट टाउन शाखा के बर्खास्त अधिकारी सुनील कुमार हंसदा स्केल-1 अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान उन्होंने लोक सेवक की हैसियत से पदस्थ रहने के दौरान समय-समय पर लाखों रुपए की गड़बड़ी की। इसके तहत बैंक के ग्राहकों के खातों में जमा राशि कूटरचित तरीके से अपने व्यक्तिगत उपयोग में ली। यूजर आईडी व पासवर्ड चोरी किया। सीबीआई कोर्ट ने दोषी अफसर को को धारा 409 के तहत तीन बार 10-10 साल की सजा सुनाई। इस तरह प्रारंभिक सजा 30 साल और जुर्माना 9 लाख लगाया गया। धारा 420 में 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख का जुर्माना लगाया गया। धारा 477 में 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख का जुर्माना लगाया गया। धारा 13 (1)(सी) व (डी) सहपठित धारा 13 (2) अधिनियम 1988 के तहत 5 वर्ष का कारावास और 3 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।


जीएसटी की कार्रवाई : सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से वसूले तीन करोड़ रुपए

जबलपुर. स्टेट जीएसटी ने सर्विस प्रोवाडर लिमिटेड कंपनी पर छापा मारकर लाखों रुपए की जीएसटी की चोरी उजागर की। कंपनी को नोटिस देने के साथ ही शुक्रवार को टैक्स के रूप में तीन करोड़ रुपए की राशि जमा कराई। वहीं बकाया टैक्स के लिए भी कार्रवाई की जा रही है। इसी प्रकार कंपनी को स्टेट जीएसटी की तरफ से नोटिस भी दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि दक्षिण भारत की इस कंपनी के जबलपुर सहित आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना में कार्यालय हैं। यह कंपनी अलग-अलग प्रकार की सर्विस के लिए कर्मचारी मुहैया करवाती है। जब जीएसटी लागू हुआ तब कंपनी की ओर से प्रॉविजनल रजिस्टे्रशन लिया गया था। स्थानीय रजिस्टे्रशन के लिए देरी कर दी। इस बीच कंपनी अपना काम करती रही।
स्टेट जीएसटी की टीम ने जब कंपनी के खातों के अलावा कारोबार संबंधी लेनदेन की जानकारी जुटाई इसमें टैक्स संबंधी गड़बडिय़ां सामने आई। जांच में लाखों रुपए की टैक्स चोरी सामने आई। इसी आधार पर कंपनी के संचालकों को नोटिस जारी किए गए। उनसे तुरंत टैक्स जमा करवाने के लिए कहा गया। शुक्रवार को कंपनी ने तीन करोड़ रुपए की राशि चालान के माध्यम से जमा करवा दी।

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