यह है संस्कारों वाली शिक्षाधानी

जबलपुर के शिक्षण संस्थानों से हर साल निकलते हैं 50 हजार छात्र

 

 

By: shyam bihari

Published: 06 Jun 2020, 08:24 PM IST

शहर में शिक्षण संस्थान
- रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
- वेटरनरी विश्वविद्यालय
- कृषि विश्वविद्यालय
- मेडिकल यूनिवर्सिटी
- लॉ यूनिवर्सिटी
- महर्षि महेश योगी विवि
- ट्रिपल आईटीडीएम
- जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज

ये है स्थिति
- 06 विश्वविद्यालय
- 02 तकनीकी संस्थान
- 75 हजार छात्र
- 40 हजार छात्र केवल रादुविवि में
- 50 हजार छात्र हर साल होते हैं पास आउट

जबलपुर। संस्कारधानी की पहचान शिक्षाधानी के रूप में भी है। इसका कारण यहां कई विश्वविद्यालयों और उच्च कोटि के शिक्षण संस्थान हैं। इन संस्थानों से हर साल हजारों छात्र स्नातक, इंजीनियर, और चिकित्सक बनकर निकलते हैं। कमी है तो समन्वित प्रयास और अधिक से अधिक रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने की। विशेषज्ञों के अनुसार संस्थानों का समुचित उपयोग किया जाए तो शहर उच्च शिक्षा के साथ रोजगार का केंद्र भी बन सकता है।

यदि सभी संस्थान मिलकर प्रयास करें तो एक-दूसरे के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। इसके लिए तकनीक को शेयर करना होगा। शहर में ट्रिपल आईटीडीएम और जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे तकनीकी संस्थान हैं, जो अपनी तकनीक और दूसरे विश्वविद्यालय के ज्ञान को मिलाकर शिक्षा को नई दिशा दे सकते हैं। इससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। सभी शिक्षण संस्थानों से हर साल करीब 50 हजार छात्र पासआउट होते हैं। एक अनुमान के अनुसार पासआउट छात्रो में से 40 फीसदी रोजगार से जुड़ जाते हैं। 25 फीसदी उच्च शिक्षा के लिए चले जाते हैं। जबकि 35 फीसदी छात्र रोजगार के लिए जद्दोजहद करते हैं।
शिक्षण संस्थानों में छात्र
रादुविवि में 40 हजार, मेडिकल विश्वविद्यालय के अतंर्गत 17 हजार, वेटरनरी विवि के अंतर्गत 2200, जेईसी के अंतर्गत तीन हजार, ट्रिपल आईटीडीएम में 1800, धर्मशास्त्र लॉ यूनिवर्सिटी में करीब 255 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त करते हैं। महर्षि महेश योगी संस्थान में आठ हजार और कृषि विवि में 3500 छात्र-छात्राएं हैं।

आईटी विशेषज्ञ प्रो. प्रशांत जैन के अनुसार शहर में उच्च तकनीकी संस्थान और ट्रेडिशनल यूनिवर्सिटी हैं। यदि दोनों संस्थान मिलकर इंटर्नशिप जनरेट करें तो इसका फायदा उन्हें मिलेगा। दोनों संस्थानों के पास अपना इन्फ्रास्टक्चर है। इससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। रादुविवि के निदेशक कौशल विकास संस्थान प्रो. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि किसी भी संस्थान के लिए रोजगारोन्मुखी पाठयक्रम का संचालन आवश्यक है। विश्वविद्यालय का कौशल विकास केंद्र इस दिशा में प्रयास कर रहा है। रोजगार से सम्बंधित कई पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।

वेटरनरी यूनिवर्सिटी डीन डॉ. आरके शर्मा मानते हैं कि वेटरनरी विवि के कई पाठ्यक्रमों को रोजगार की दृष्टि से डिजाइन किया गया है।पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद एक भी छात्र बेरोजगार नहीं रहता। किसानों को भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है। जेईसी के प्राचार्य प्रो. एसएस ठाकुर मानते हैं कि पारम्परिक पढ़ाई के साथ अब रोजगोरोन्मुखी पढ़ाई की भी आवश्यकता है। इसके लिए पाठ्यक्रमों को रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए।

shyam bihari Desk
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