script7 time mayor Bhavani Prasad was a poet before the politician | सात बार के मेयर राजनेता से पहले थे कवि, जहां बैठे वहीं महफिल | Patrika News

सात बार के मेयर राजनेता से पहले थे कवि, जहां बैठे वहीं महफिल

1950 से लेकर 1956 तक सात बार महापौर रहे 1964 व 1971 में राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए नारी शिक्षा के थे पैरोकार,बालिका शाला, महिला महाविद्यालय खोला

जबलपुर

Published: June 19, 2022 11:14:43 am

मनीष गर्ग@जबलपुर। पं. भवानी प्रसाद तिवारी कांग्रेस का रास्ता चुनने के बजाय, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के साथ गए। उसी से महापौर बने। दो बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। उन्होंने राजनीति में उच्च आदर्श स्थापित किए। वे कवि थे और राजनीति में सक्रिय हुए तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1950 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा। वे नगर निगम के पहले ही कार्यकाल में गैर कांग्रेसी महापौर थे। उस समय महापौर का कार्यकाल एक वर्ष का होता था। 1950 से लेकर 1956 तक वे महापौर चुने जाते रहे।

mayor Bhavani Prasad
mayor Bhavani Prasad

स्कूल-कॉलेज खोले

पुत्रवधु अनामिका के अनुसार पं. भवानी प्रसाद बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करते थे। महाकौशल शिक्षा प्रसार समिति का गठन कर उन्होंने विदामबाई बालिका शाला व चंचल बाई महिला महाविद्यालय, भातखंडे संगीत महाविद्यालय की स्थापना की।

विरोधी भी समर्थक बन जाते थे

पं. तिवारी की पुत्र वधु जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड प्रोफेसर अनामिका तिवारी बताती हैं कि उनकी सादगी ऐसी थी कि विरोधी भी समर्थक बन जाते थे। निवास स्थान राइट टाउन भवानी सदन में बाउंड्री नहीं थी। घर के चारों ओर लताओं की झाडिय़ा थी। मिलने के लिए कोई खास हो या आम किसी को समय नहीं लेना पड़ता था। वर्ष 1929 में चेरीताल स्कूल में तुलसीदास जी पर प्रतियोगिता थी। उसमें अनायास ही पहुंच गए। काव्यपाठ किया, तो सभी ने उनकी तारीफ की और प्रथम पुरस्कार मिला।

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साइकिल थी पहचान

पं. भवानी प्रसाद साइकिल से ही शहर भ्रमण पर निकलते थे। साहित्यकार पंकज स्वामी बताते हैं कि उन्हें निगम की ओर से कार आवंटित थी, लेकिन वे हमेशा कहते थे यह सरकारी काम के लिए है। निजी काम साइकिल से ही करना चाहिए। उन्हें भीड़ से संवाद स्थापित करने में महारत थी। पंकज स्वामी ने एक किस्सा सुनाया। 1957 में पं. भवानी प्रसाद महापौर का चुनाव हार गए। इससे उनके समर्थक इतने क्रुद्ध हो गए कि जीते प्रत्याशी के जुलूस को रोक दिया। मंच पर कब्जा कर लिया। हालात बिगड़ते देख तत्कालीन पुलिस अधिकारी भवानी प्रसाद के पास पहुंचे और आग्रह कर प्रदर्शन स्थल पर ले गए। उन्होंने भाषण देकर भीड़ को शांत करा दिया।

आज की राजनीति ने भुला दिया

अनामिका तिवारी अफसोस जाहिर करते हुए कहती हैं कि संस्कारधानी के निर्माता को इस शहर और आज के दौर की राजनीति ने भुला दिया। उनके ससुर से मिलने के लिए किसी को समय नहीं लेना पड़ता था। लेकिन, 2012-13 में जन्मशती के आयोजन की तैयारी के लिए तत्कालीन महापौर व पदाधिकारियों से मिलने की कोशिश की, तो 15 दिन लग गए। उनसे जुड़ी यादों को सहेजने के लिए एक बुकलेट का प्रकाशन किया। लेकिन, नगर निगम से जरा भी सहयोग नहीं मिला। नगर निगम से जन्म शताब्दी समारोह में आयोजन कराने के लिए आग्रह किया, लेकिन निगम ने प्रथम महापौर की स्मृति को भुला दिया। पं. भवानी प्रसाद की भांजी रजनी झा ने भी उनसे जुड़े संस्मरण सुनाए।

परिवार से कोई राजनीति में नहीं

वरिष्ठ साहित्यकार व विश्लेषक पंकज स्वामी कहते हैं कि राजनीति में परिवारवाद पर खूब चर्चा होती है। लेकिन, पं. भवानी प्रसाद ने उस दौर में ही परिवार को राजनीति की छाया से मुक्त रखा था। उनकी पांच पुत्रियां गीता, चित्रा दुबे, आभा दुबे, प्रतिभा शर्मा, मंगला शर्मा हैं। एक पुत्र स्व. सतीश तिवारी थे। लेकिन, परिवार से कोई राजनीति में नहीं है।

स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका और रवींद्रनाथ टैगोर की कालजयी कृति गीतांजलि का अनुगायन कर सुर्खियों में आए पं. भवानी प्रसाद तिवारी ने 1950 में जबलपुर नगरनिगम का पहला महापौर बनकर सभी को चौंका दिया। लगातार सात बार नगर की कमान सम्भालकर आधुनिक जबलपुर की नींव रखी। उनकी सादगी के सभी कायल थे।

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