डिजिटल इंडिया की बुनियाद पस्त, 76 फीसदी स्कूलों में नहीं बिजली

डिजिटल इंडिया की बुनियाद पस्त, 76 फीसदी स्कूलों में नहीं बिजली

Mukesh Gaur | Publish: Aug, 13 2018 07:00:00 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हाल-बेहाल: बारिश और सर्दियों में पढ़ाई करने में आती हैं मुश्किलें

 

जबलपुर. प्रधानमंत्री एक ओर जहां डिजिटल इंडिया और डिजिटल स्कूल पर जोर दे रहे हैं, वहीं जिले के 1720 (76 प्र्रतिशत) सरकारी स्कूलों में बिजली व्यवस्था के नाम पर एक बल्ब भी नहीं है। आलम यह है कि बिजलीविहीन स्कूलों में कई बार अंधेरे की स्थिति बनती है। बारिश और ठंड में स्थिति और भी गहरी हो जाती है। छात्र किताबें तक नहीं पढ़ पाते। स्कूलों के हालात पर पत्रिका ने पड़ताल की। जिले में 2200 से अधिक सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें से मात्र 535 स्कूलों में ही बिजली की व्यवस्था है। शेष स्कूलों में बिजली कनेक्शन तो दूर अभी तक खम्भे भी नहीं लगाए जा सके हैं। इसका कारण स्कूलों को बिजली के लिए अलग से फंड नहीं मिलने और कनेक्शन के लिए तकनीकी प्रक्रिया को माना जा रहा है। स्कूल में बिजली कनेक्शन पर करीब पांच हजार का खर्च आता है। इसमें कनेक्शन के लिए आवेदन, डिमांड, सर्विस लाइन का शुल्क 1500 है। मीटर बोर्ड, आम्र्ड केबल, पाइप, ठेकेदार का खर्च 2 से 4 हजार है। स्कूल से बिजली पोल की दूरी अधिक होने पर राशि बढ़ जाती है।

स्कूलों की समस्या
बिजली के लिए अलग से फंड नहीं
बिजली का ज्यादा बिल बनी परेशानी
चंदा कर जुटाते हैं बिल की राशि

आंकड़ों की जुबानी
2255 कुल स्कूल जिले में
1.5 लाख कुछ छात्र
218 स्कूल शहरी सीमा में
345 स्कूल शहर-ग्रामीण में
1692 स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों

बिजली की स्थिति
1720 स्कूलों में बिजली नहीं
535 स्कूलों में है बिजली
302 सर्वाधिक जबलपुर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल
250 आवेदन में लम्बित

स्कूलों ने विभाग पर डाला बोझा
सूत्रों के अनुसार स्कूलों को बिजली कनेक्शन के लिए खुद ही बिजली कम्पनी के दफ्तर में आवेदन करना था। स्कूलों ने खर्च से बचने के लिए आवेदन ही नहीं किया और न ही कोई अन्य पहल की। पूरा बोझ विभाग पर डाल दिया गया। हालांकि कई स्कूल ऐसे भी है, जिन्होंने अपने स्तर पर कनेक्शन कराया है। बिजली बिल का भुगतान भी कर रहे हैं।
वर्तमान में शिक्षा से जुड़े सभी काम ऑनलाइन हो रहे हैं। शासन को स्कूलों में शौचालय निर्माण की तरह बिजली के लिए भी अभियान चलाना चाहिए।
अंजनी सेलट, विकासखंड शिक्षा अधिकारी

यह सही है कि अधिकतर स्कूलों में बिजली नहीं है। इसके लिए स्कूलों को सम्बंधित बिजली कार्यालय में आवेदन करने के लिए कहा गया है। कुछ आवेदने कम्पनी स्तर पर लम्बित हैं।
ओपी सिंह, सहायक यंत्री, जेएसके

स्कूलों की ओर से आवेदन आने पर विभाग आवश्यक कार्रवाई करेगा। स्कूलों के पास फंड की कमी भी एक समस्या है।
केके सोनवाने, एसई रूलर पूर्व क्षेत्र बिजली कम्पनी

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