काम अटके पड़े हों या व्यापार में हो रहा है घाटा तो इस दिन करें ये आसान उपाय

deepak deewan

Publish: Apr, 17 2018 02:33:27 PM (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
काम अटके पड़े हों या व्यापार में हो रहा है घाटा तो इस दिन करें ये आसान उपाय

गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शांत करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना शुभ होता है

जबलपुर। अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है। इसे आखातीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। इस पर्व को देश के खास त्योहारों की श्रेणी में रखा जाता है। अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामथ्र्य के अनुसार जितना भी किया जाए, अक्षय रूप में प्राप्त होता है। अक्षय तृतीया कई मायनों में बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। ग्रीष्म ऋतु का आगमन, खेतों में फसलों का पकना और उस खुशी को मनाते खेतिहर व ग्रामीण लोग विभिन्न व्रत, पर्वों के साथ इस तिथि का आगमन होता है। पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के तीन शुभ रूपों का अवतरण भी इसी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था।
शुरु करें नए काम
माना जाता है कि किसी कार्य के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल पा रहा हो तो इस स्थिति में अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है। पंडित जनार्दन शुक्ला बताते हैं कि जिनके अटके हुए काम नहीं बन पाते या जिनके व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो उसे इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन स्वर्णादि आभूषणों की खरीद को भाग्य की शुभता से जोड़ा जाता है।
पौराणिक महत्व- इस पर्व से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाओं में से एक कथा के अनुसार महाभारत के दौरान पांडवों के भगवान श्रीकृष्ण से अक्षय पात्र लेने का उल्लेख आता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के पास से मुट्ठी-भर चावल प्राप्त किए थे। इस तिथि में भगवान नर-नारायण, परशुराम, हयग्रीव आदि रूपों में अवतरित हुए थे, इसलिए इस दिन इन अवतारों की जयंतियां, उत्सव रूप में मनाई जाती हैं। त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन से होना माना जाता है। इसलिए यह तिथि, युग तिथि भी कहलाती है। इसी दिन प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनारायण के कपाट भी खोले जाते हैं।
दान-पुण्य का विशेष फल- अक्षय तृतीया में पूजा, जप-तप, दान आदि शुभ कार्यों का विशेष फल रहता है। इस दिन गंगा-यमुना आदि पवित्र नदियों और तीर्थों में, स्नान करने का विशेष फल प्राप्त होता है। यज्ञ, होम, देव-पितृ तर्पण, जप, दान आदि कर्म करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शांत करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना शुभ होता है। इस दिन माता पार्वती का पूजन भी करना शुभ रहता है।

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