खेतों पर मंडरा रहे तितलियों के अजीब झुंड, कांप उठे किसान, देखें लाइव वीडियो

खेतों पर मंडरा रहे तितलियों के अजीब झुंड, कांप उठे किसान, देखें लाइव वीडियो

Premshankar Tiwari | Publish: Aug, 12 2018 09:16:13 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

फसल की पत्तियों पर अंडे दिए तो केटरपिलर लार्वा बनेगा मुसीबत

नरसिंहपुर/जबलपुर। जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों तितलियों के झुंड कौतूहल का विषय बने हुए हैं। खेतों के अलावा यहां शहरी क्षेत्रों में भी आसमान पर हजारों की तादाद में तितलियां देखी जा रही हैं। ये रंग बिरंगी तितलियां देखने में तो बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन फसलों में इनका इनका मंडराना किसानों को भयभीत कर रहा है। हालांकि यह मौसम तितलियों के प्रजनन और उडऩे का ही है, लेकिन इनकी संख्या ने किसानों को चिंतित कर दिया है। किसानों का मानना है कि तितलियों ने फसल के पत्तों में अंडे दिए तो केटलपिलर लार्वा पनपेगा, जो फसलों की पत्तियों को अपना भोजन बना डालेगा। इससे भारी नुकसान संभावित है।

किसानों के अनुसार जिले में बीते 2-3 दिनों से तितलियों के झुंड के झुंड बहुतायत संख्या में आसमान में उड़ते और खेतों में फसलों पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। तितलियों के बहुत बड़े झुंड उत्तर दिशा से आकर दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं। उन्नत कृषक भारत पटेल का मानना है कि तितलियों के आने की प्रक्रिया सामान्य है, लेकिन इतनी तादाद में आना परेशानी का सबब बन सकता है। वर्तमान में फसलें फूल पर भी हैं जिससे पराग कण प्राप्त करने खेतों में बैठने के दौरान अंडे देने से विकट स्थिति बन सकती है।

लार्वा हो सकता है घातक
करताज निवासी उन्नत कृषक राकेश दुबे का कहना है कि वर्तमान में बारिश का माहौल है। ऐसे में यदि कीट की व्याधि उत्पनन हुई तो दवाईयां डालना कठिन हो जाता है। पौधों पर दवाई डालने के बाद बारिश होने से दवा का असर घट जाता है और कीट का प्रकोप नियंत्रित नहीं हो पाता। तितली यदि लार्वा छोड़ जाती है और इससे उत्पन्न कीट पत्तियों को भोजन बनाएगा तो निश्चित तौर पर उपज प्रभावित होगी।

पंखों में पीले चिट्टे
उन्नत कृषक दुबे ने बताया कि बहुतायत संख्या में आईं तितलियों के पंख काले व उन पर पीले चिट्टे हैं। यह लाइम या लेमन बटरफ्लाई नामक प्रजाति के रूप में जानी जाती है। यह तितली विंध्याचल पर्वत पर बिल्डिंग के बाद अपने लार्वा को वहीं पालती है। जुलाई-अगस्त के महीने में यह दक्षिण के मैदानी क्षेत्रों की तरफ पलायन करती है और मार्च अप्रैल के महीने में यह वापस लौट कर आती है। इतनी संख्या में तितली के झुंड निकलने की स्थिति पहलीबार देखने मिल रही है। अभी नर्मदा के किनारे के कुछ गांव धमना सुपला सहित विभिन्न क्षेत्रों से जानकारी मिल रही है कि वहां पर इनकी संख्या लाखों में है। तितलियों के झुंड का प्रभाव की स्थिति आगामी सप्ताह या 15 दिनों बाद ही सामने आएगी। इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को भी दी गई है।

भयभीत न हों किसान
बारिश के मौसम में तितलियां प्रजनन करती हैं। इस मौसम में इनका माइग्रेशन और स्थान परिवर्तन भी होता है। यह सामान्य प्रक्रिया है। जहां तक लाइम या लेमन बटरफ्लाई का सवाल है तो ये फसलों को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। इनसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। हां इनकी संख्या का अधिक होना अवश्य जांच का विषय है। इसका पता लगाया जाएगा। इसका एक कारण बारिश की कमी और उमस की अधिकता भी हो सकता है।
डॉ. संजय वैशम्पायन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, जेएनकेविवि

इनका कहना है
तितलियों की जो प्रजाति सामने दिख रही है उससे सोयाबीन, उड़द जैसी फसलों को कोई नुकसान नहीं है। इन तितलियों का लार्वा नीबू जैसे पेड़ों की गद्देदार पत्तियों का सेवन करता है। अभी इनके आने की शुरूआत है ज्यादा संख्या में तितलियों का आने के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी एवं जमीनी अमले से इसके द्वारा नुकसान होने की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
डॉ. आरएन पटैल
मृदा परीक्षण अधिकारी, नरसिंहपुर

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