murder of a girl- गुस्से से उबला यह शहर, सबने पूछा- हैवान, आदमखोर, दरिंदा जिंदा कैसे है?

जबलपुर में युवती की हत्याकांड से छाया है मातमी गुस्सा

Anger shadowed in Jabalpur murder of a girl

By: shyam bihari

Published: 03 Dec 2019, 06:23 PM IST

जबलपुर। ऊपर से शांत नजर आने वाले जबलपुर शहर में भी कोई सिरफिरा आदमखोर बन सकता है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। इसलिए सोमवार को इस तरह की वारदात सामने आई, तो पूरा जबलपुर शहर उबल पड़ा। हर किसी के चेहरे गुस्से से उबल रहे हैं। सब एक दूसरे से सवाल कर रहे हैं कि आखिर अपने बीच रहने वाला हैवान, आदखोर, दरिंदा जिंदा कैसे है? सबकी पैरवी है कि आम लोगों को तो कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। लेकिन, पुलिस को इतनी कार्रवाई करनी चाहिए कि कोई किसी की जान लेना तो दूर, खरोंच मारने के पहले भी घबराए।
समझो इंसानियत मर गई
युवती की हत्या के बाद शहरवासी पुलिस की खूब आलोचना कर रहे हैं। सबका कहना है कि पुलिस चाहे तो अपराधी अपराध करने के बारे में सोचने से पहले कांप उठे। इस हत्याकांड के बारे में कहा जा रहा है कि हर शहरवासी की आंखें गुस्से से उबल चाहिए भी। यदि गुस्से से किसी का खून नहीं उबल रहा है, तो कहना पड़ेगा उसमें इंसानियत मर गई है। फूल सी बच्ची पर चाकू के 80 वार करने वाले को जिंदा जला देना, बोटी-बोटी काट देना, सरेआम गोली मार देना, जैसी बातें भी आम लोगों के दिल-दिमाग में आ रही हैं। हालांकि, हर कोई चाहता है कि कार्रवाई कानून के हिसाब से हो। जबलपुर शहर की पुलिस इतनी सुस्त चाल रही है कि लोगों का गुस्सा उसपर फूटना स्वाभाविक है।
बहानेबाजी का दौर
लोगों का कहना है कि पुलिस हर व्यक्ति की सुरक्षा में तैनात नहीं रह सकती। लेकिन, हैवानों के जेहन में कानून का डर पैदा करना पुलिस का ही जिम्मा है। हैवानों को इस बात का खौफ होना ही चाहिए कि कानून का डंडा हलक फाड़ देता है। क्रूरतम अंदाज में हत्या की वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी आदमखोर बनने के बहुत पहले से बच्ची को परेशान कर रहा था। बदले में बच्ची का पिता पुलिस के सामने गिड़गिड़ा रहा था। कई बार हाथ जोड़कर कार्रवाई की गुहार लगाई। लेकिन, हर बार पुलिस ने उसे झिड़ककर भगा दिया। पुलिस महज यह कहती थी कि जाओ देख लेंगे। लेकिन, पुलिस ने कुछ नहीं किया।
कब तक गिड़गिड़ाएंगे लोग
बच्ची का पिता बेचारगी का भार लिए कई दरवाजों पर गया। रोया-गिड़गिड़ाया। लेकिन, उसके साथ कोई खड़ा नहीं हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि मनचले की हरकत बढ़ती गई। वह बच्ची को अपनी जागीर बताता रहा। पुलिस जैसी कोई व्यवस्था उसके लिए मायने नहीं रखती थी। अब पुलिस यह कह कर नहीं बच सकती कि उसे इतना कुछ होने का अंदाजा नहीं था। वह यह भी नहीं कह सकती कि कार्रवाई कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि समाज में इस वारदात के बाद गुस्सा नहीं आ रहा है, तो यह भी अपराध ही माना जाएगा। ऐसी वारदातों को मूकदर्शक बनकर देखने वालों को भी इतिहास माफ नहीं करता। हम कानून को हाथ में नहीं ले सकते। लेकिन, बच्ची के पिता की इतनी मदद तो कर सकते हैं कि दरिंदे को फांसी जरूर हो। पुलिस ने इस मामले में भी अपनी भाषा का इस्तेमाल किया, तो आगे भी कई दरिंदे पैदा होंगे।

shyam bihari Desk
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