शिक्षा के लिए लगाएं दम, तो सबसे आगे होंगे हम

सरकार से लेकर नेताओं शिक्षाविदों ने हीं दिया ध्यान, छह विश्वविद्यालय फिर भी शिक्षा हब से दूर,ट्रेडिशनल कोर्स से हटकर नए पाठ्यक्रमों की जरूरत, केंद्र राज्य से प्रोजेक्ट लाकर जमीनी धरातल पर उतारने की जरूरत

By: Mayank Kumar Sahu

Published: 10 Jul 2020, 12:32 PM IST

फैक्ट फाइल
-06 विश्वविद्यालय
-02 तकनीकी संस्थान
-75 हजार छात्र अध्ययनरत
-40 हजार छात्र सिर्फ रादुविवि
-50 हजार छात्र हर साल पास आउट

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यह है जरूरत
-इंडस्ट्री बेस कोर्स की कमी
-डिफेंस से जुड़े कोर्स नहीं
-तकनीक आधारित कोर्स की कमी
-डिजाइन एवं कल्स्टर कोर्स जरूरी
-फूड एवं होटल मैनेजमेंट कोर्स नहीं
-पढ़ाई के साथ पार्ट टाईम जॉब की व्यवस्था
-छात्रों के रहने के लिए सुरक्षित परिवेश

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यह है कमियां
-ट्रेडिशनल कोर्सों का हो रहा संचालन
-शहर की ठीक से ब्रांडिंग न होना
-रोजगारोन्मुखी पाठयक्रमों पर नहीं ध्यान
-विश्वविद्यालयों का पर्याप्त बजट न देना
-प्रबंधन से जुड़े पुराने कोर्सों का संचालन
-होटल ऑटोमोबाइल कोर्स पर फोकस नहीं
-मोबाइल तकनीक आधारित कोर्स नहीं
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शिक्षा से जुड़े यह संस्थान
-रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
-वेटरनरी विश्वविद्यालय
-कृषि विश्वविद्यालय
-मेडिकल यूनिवर्सिटी
-लॉ यूनिवर्सिटी
-महर्षि महेश योगी विवि
-ट्रिपल आईटीडीएम
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मयंक साहू @ जबलपुर.

शहर के विकास में जितना योगदान उद्योग धंधों, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुख सुविधाओं का होता है उतना ही योगदान एजुकेशन का होता है। शहर में कहने के लिए तो 6-6 विश्वविद्यालय हैं। लेकिन जिस तरीके प्रदेश अथवा अन्य राज्यों के जिलों में शिक्षा में क्षेत्र में सरकारें ने प्रगति की है हमारा शहर वह नहीं कर सका। इसके पीछे राजनीतिक एप्रोच की कमी तो वहीं केंद्र एवं राज्य की योजनाओं को ला पाने में असमर्थता एवं उच्च शिक्षा संस्थानों की उदासीनता भी है। विशेषज्ञों को कहना है कि हमारे शहर में अधोसंरचना से लेकर प्राकृतिक संसाधन, डिफेंस फैक्ट्रीयां आदि चीजें दूसरों शहरों से बेहतर हैं यदि इनको शिक्षा और रोजगार से जोडकऱ शुरू किया जाए तो निश्चित ही शहर कोटा, इंदौर जैसे शहरों के समतुल्य खड़ा हो सकता है। इसके लिए शिक्षाविदों से लेकर राजनैतिक स्तर पर भी पहल की जरूरत है।

50 हजार छात्र पासआउट
शिक्षा संस्थानों से हर साल करीब 50 हजार छात्र पासआउट होते हैं। कुछ संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो इसमें से कुछ ही रोजगार पाने में सफल हो पाते हैं। एक अनुमान के अनुसार पासआउट होने वाले छात्रो में से करीब 40 फीसदी छात्र रोजगार से जुड़ जाते हैं। 25 फीसदी छात्र आगे की शिक्षा के लिए चले जाते हैं वहीं जबकि 35 फीसदी छात्र रोजगार के लिए जद्दोजहद करते हैं।

संस्थानों की यह है स्थिति
रादुविवि में सर्वाधिक 40 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। जबकि मेडिकल विश्वविद्यालय के अतंर्गत 17 हजार, वेटरनरी विवि के अंतर्गत करीब 2200, जेईसी के अंतर्गत 3000, ट्रिपलआईटीडीएम 1800, धर्मशास्त्र लॉ यूनिवर्सिटी से करीब 255 छात्र अध्यनरत हैं। महर्षि महेश योगी संस्थान से 8 हजार तो वहीं कृषि विवि से करीब 3500 हजार छात्र अध्यनरत बताए जाते हैं।

डिफेंस, बीएसएनएल लेकिन टैक्नोलॉजी नहीं
शहर में आर्डिनेंस फैक्ट्ररी, वीएफजे, ग्रे आयरन फैक्ट्री, जीसीएफ फैक्ट्री,सीओडी जैसी डिफेंस फैक्ट्रियां हैं। फैक्ट्रियां तो खड़ी हैं लेकिन यह टैक्नोलॉजी नहीं दे रही हैं। शिक्षा पाठयक्रम में टैक्नोलॉजी को समाहित कर डिफेंस से जुड़े कोर्स शुरू किए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह बीएसएनएल का एशिया का सबसे बड़ा तकनीकी ट्रेनिंग इंस्टीटयूट है लेकिन यहां की तकनीक विश्वविद्यालयों तक नहीं है। आधुनिक लैब का उपयोग करने के साथ तकनीक आधारित कोर्स शुरू किए जा सकते हैं।
होटल इंडस्ट्री लेकिन कोर्स नहीं
शहर में होटलों की एक बड़ी श्रंखला शहर में हैं। इसमें कई मल्टीस्टार होटलें भी शामिल हैं। कुछ पाईपलाइन में है। लेकिन इन होटलों में जॉब के लिए फूड, बेवरीज, होटल मैनेजमेंट, केटरिंग से जुड़े कोर्स आज नहीं हैं। ऐसे में जहां सीधे तौर पर रोजगार उपलब्ध हो सकता है वह सेक्टर भी अछूता है। छात्र नागपुर, पूना, बैंगलुरु की और रुख कर रहे हैं।

-शहर में डिफेंस, बीएसएनएल जैसें संस्थान हैं। इनके पास आधुनिक तकनीक है। इसका उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में नहीं हो रहा है। हम आज भी10 साल पुराना ज्ञान छात्रों को दे रहे हैं। जबकि तकनीक आधारित कोर्सों का संचालन किया जाने की जरूरत है। इसके लिए हमें पैरामीटर बनाने होंगे।
-डॉ.पंकज गोयल, आईटी विशेषज्ञ

-विवि कौशल विकास के माध्यम से कई नए रोजगारोंन्मुखी कोर्स संचालित कर रहा है। छात्रों को प्लसमेंट की भी दिशा में जॉबफेयर की भी शुरुआत की है जो किअब साल में दो बार कर रहे हैं। नए पाठयक्रमों को लेकर हम प्रयासरत हैं।
-प्रो.कपिलदेव मिश्र, कुलपति रादुविवि

-यह जरूरी है कि रोजगार से जोडकऱ कोर्सों को शुरू किया जाए। साथ ही विवि की भी जरूरतों को सरकार पूरा करे ताकि विवि शिक्षा के प्रति ज्यादा से ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सके। युवाओं को पैरों पर खड़ा करने के लिए हम नि:शुल्क आवासीय टे्रनिंग दे रहे हैं।
-डॉ.पीके बिसेन, कुलपति कृषिविवि

-तकनीकी संस्थनों की टैक्नोलॉजी को विश्वविद्यालयों के साथ शेयर करने की जरूरत है। उनके यहां उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर हम अपने संस्थान को बेहतर बना सकते हैं।
-डॉ.प्रशांत जैन, जेईसी


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Mayank Kumar Sahu Reporting
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