इसलिए नहीं हो पा रहा शहर के इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार, जानिए क्या है कारण

राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारी करा रहे काम, लोकसभा चुनाव के बाद काम शुरू होने की सम्भावना

By: praveen chaturvedi

Published: 10 Mar 2019, 08:30 AM IST

जबलपुर। ग्वारीघाट मार्ग स्थित पोलीपाथर में स्थित प्राचीन बादशाह हलवाई मंदिर का जीर्णोद्धार एक साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। अभी मंदिर की सीढ़ी ही बनाई जा सकी है। सडक़ चौड़ीकरण और मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण उसी स्वरूप में करने की तकनीकी स्वीकृति के इंतजार में काम रुका हुआ है। बताया गया कि लोकसभा चुनाव के बाद स्वीकृति मिलने पर काम शुरू होगा। प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए मुख्य मंदिर को लोहे की ग्रिल से घेरा गया है।

राज्य पुरातत्व विभाग ने मंदिर को अपने संरक्षण में लिया है। विभाग के अधिकारियों की देखरेख में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। जीर्णोद्धार के लिए डेढ़ साल पहले प्रदेश शासन ने २९ लाख रुपए स्वीकृत किए थे। १० लाख रुपए के काम होने के बाद सडक़ चौड़ीकरण की बाधा आ गई। पुरातत्व विभाग और नगर निगम प्रशासन के बीच मंदिर के बगल से सीढ़ी बनाकर मुख्य द्वार को पीछे ले जाने का अनुबंध हुआ। मुख्य द्वार का निर्माण उसी स्वरूप में करने की तकनीकी स्वीकृति की फाइल भोपाल मुख्यालय में अटकी हुई है। अब लोकसभा चुनाव के बाद टेंडर प्रक्रिया और अन्य कार्य होने की सम्भावना है।

कल्चुरी कालीन प्रतिमाएं
पहाड़ी पर स्थित बादशाह हलवाई मंदिर के गर्भगृह में संगमरमर की दशभुजी भगवान शिव और उमा की कल्चुरीकालानी प्रतिमाएं हैं। मंदिर ३० स्तम्भों पर बना है। स्तम्भों और दीवारों में भी प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। श्री यंत्र, नौ ग्रहों और २७ नक्षत्रों की प्रतिमाएं विशेष हैं।

परिसर में है प्राचीन गुफा

मंदिर परिसर में एक प्राचीन गुफा भी है। मंदिर से जुड़े आनंद दुबे के अनुसार प्राचीन काल में यह गुफा मदन महल किले और ग्वारीघाट में खुलती थी। मंदिर परिसर से गुफा और दोनों मार्ग आज भी दिखाई देते हैं।

मंदिर के मुख्य द्वार का स्थान परिवर्तन होने के कारण जीर्णोद्धार का काम पूरा नहीं हो सका है। तकनीकी स्वीकृति के लिए भोपाल मुख्यालय को एस्टीमेट भेजा गया है। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने पर गेट का काम काम शुरू होगा।
पीसी महोबिया, डिप्टी डायरेक्टर, राज्य पुरातत्व विभाग

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