गुप्त नवरात्रि: दुश्मनों का नाश करती है ये देवी, ऐसे करें सिद्ध

Lalit kostha

Publish: Jul, 14 2018 12:25:46 PM (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
गुप्त नवरात्रि: दुश्मनों का नाश करती है ये देवी, ऐसे करें सिद्ध

गुप्त नवरात्रि: दुश्मनों का करना है विनाश, तो करें इस देवी को प्रसन्न

 

जबलपुर। गुप्त नवरात्रि शनिवार से शुरू हो गई हैं। आज घट स्थापना से लेकर तंत्र साधना सब शुरू हो जाएगी। ऐसे में दस महाविद्यायाओं का पूजन वंदन इन आठ दिनों में करना श्रेयष्कर रहेगा। ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज के अनुसार जो भी भक्त मां बगलामुखी का पूजन इन दिनों करता है, उसे दुश्मनों का नाश हो जाता है।


दस महाविद्याओं में शामिल मां बगलामुखी, समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय द्वीप में अमूल्य रत्नों से सुसज्जित सिंहासन पर विराजमान हैं। देवी त्रिनेत्रा हैं, मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करती है। पीले शारीरिक वर्ण युक्त है। देवी ने पीला वस्त्र तथा पीले फूलों की माला धारण की हुई है। देवी, एक युवती के जैसी शारीरिक गठन वाली हैं, देखने में मनोहर तथा मंद मुस्कान वाली हैं। देवी ने अपने बाएं हाथ से शत्रु या दैत्य के जिह्वा को पकड़ कर खींच रखा है तथा दाएं हाथ से गदा उठाए हुए हैं, जिससे शत्रु अत्यंत भयभीत हो रहा हैं।

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देवी ने अपने बाएं हाथ से शत्रु या दैत्य के जिह्वा को पकड़ कर खींच रखा है तथा दाएं हाथ से गदा उठाए हुए हैं, जिससे शत्रु अत्यंत भयभीत हो रहा हैं
माता बगुलामुखी के साधक ब्रम्हचारी चेतन्यानंद महाराज के अनुसार देवी के इस जिव्हा पकड़ने का तात्पर्य यह है कि देवी वाक् शक्ति देने और लेने के लिए पूजी जाती हैं। वे चाहें तो शत्रु की जिव्हा ले सकती हैं और भक्तों की वाणी को दिव्यता का आशीष दे सकती हैं। देवी वचन या बोल-चाल से गलतियों तथा अशुद्धियों को निकाल कर सही करती हैं। कई स्थानों में देवी ने मृत शरीर या शव को अपना आसन बना रखा हैं तथा शव पर ही आरूढ़ हैं तथा दैत्य या शत्रु की जिह्वा को पकड़ रखा हैं।


कुब्जिका तंत्र के अनुसार, बगला नाम तीन अक्षरों से निर्मित है व, ग, ला; 'व' अक्षर वारुणी, 'ग' अक्षर सिद्धिदा तथा 'ला' अक्षर पृथ्वी को सम्बोधित करता हैं। देवी का प्रादुर्भाव भगवान विष्णु से सम्बंधित हैं परिणामस्वरूप देवी सत्व गुण सम्पन्न तथा वैष्णव संप्रदाय से सम्बंधित हैं, इनकी साधन में पवित्रता-शुद्धता का विशेष महत्व हैं। परन्तु, कुछ अन्य परिस्थितियों में देवी तामसी गुण से सम्बंधित है।

आकर्षण, मारण तथा स्तंभन कर्म तामसी प्रवृति से सम्बंधित हैं। क्योंकि इस तरह के कार्य दूसरों को हानि पहुंचाने हेतु ही किए जाते हैं। सर्वप्रथम देवी की आराधना ब्रह्मा जी ने की थी, तदनंतर उन्होंने बगला साधना का उपदेश सनकादिक मुनियों को किया, कुमारों से प्रेरित हो देवर्षि नारद ने भी देवी की साधना की। देवी के दूसरे उपासक स्वयं जगत पालन कर्ता भगवान विष्णु हुए तथा तीसरे भगवान परशुराम।

शांति कर्म में, धन-धान्य के लिए, पौष्टिक कर्म में, वाद-विवाद में विजय प्राप्त करने हेतु तथा शत्रु नाश के लिए देवी उपासना व देवी की शक्तियों का प्रयोग किया जाता हैं। देवी का साधक भोग और मोक्ष दोनों ही प्राप्त कर लेते हैं।

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