Investment - शानदार तरीके ईजाद कर रहा है यह शहर, खुशी-खुशी चले आएंगे निवेशक

Investment - शानदार तरीके ईजाद कर रहा है यह शहर, खुशी-खुशी चले आएंगे निवेशक
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Shyam Bihari Singh | Updated: 16 Sep 2019, 06:46:03 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

जबलपुर से वित्तमंत्री के होने का होगा फायदा

Finance minister being from Jabalpur will be beneficial

जबलपुर। निवेश के जरिए एक बार फिर जबलपुर जिले के औद्योगिक एवं व्यापारिक पिछड़ेपन को दूर करने की कवायद शूुरू हो रही है। फ्लाईओवर, नई फोरलेन सड़क और नर्मदा रिवरफ्रंट और टूरिस्ट सर्किट जैसे दूसरे अधोसंरचनात्मक निर्माण को इसका आधार बनाया जा रहा है। इससे जिले में कृषि आधारित उद्योग के साथ ही पर्यटन एवं चिकित्सा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। इंदौर में अगले महीने हो रही मैग्नीफिसेंट मप्र 2019 समिट में भी जबलपुर को निवेश के लिए बेहद सम्भावनाओं वाले शहर के रूप में दिखाया जा सकता है। जबलपुर के लिए प्रदेश में पहले हुई लगभग सभी इन्वेस्टर्स समिट में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों में निवेश के लिए करोड़ों रुपए के एमओयू हुए, लेकिन 70 से 80 फीसदी प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं आए। महाकोशल क्षेत्र के प्रमुख जिले होने के नाते जितना औद्यागिक विकास जबलपुर का होना था, नहीं हुआ। मनेरी, उमरिया-डुंगरिया और हरगढ़ चले जाइये, यहां खाली भूमि प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। वर्ष 2008 में प्रदेश की पहली इन्वेस्टर्स समिट जबलपुर में हुई। कई हजार करोड़ के एमओयू हुए। इसके बाद लगातार समिट हुईं। उसमें जबलपुर को लेकर 50 फीसदी एमओयू भी धरातल पर आते तो शायद यहां का नजारा कुछ और होता। इंदौर व भोपाल में बराबर निवेश आया।
पिछले एमओयू और स्थिति
2008 में जबलपुर में हुई इन्वेस्टर्स मीट में अकेले एकेवीएन की बात करें तो करीब 29 एमओयू हुए थे। इनमें से हरगढ़ और दमोह में एक-एक वृहद उद्योग आए। बाकी प्रक्रिया में हैं। वहीं वर्ष 2013 की बात की जाए तो लगभग 60 एमओयू हुए थे, उनमें से 11 उत्पादन में आए लेकिन बाकी अभी प्रक्रिया में हैं। प्रदेश के वित्तमंत्री तरुण भनोत का कहना है कि जबलपुर में उद्योगों के लिए बहुत संभावनाएं हैं। विशेषकर कृषि के क्षेत्र में। यहां गन्ने की खेती बढ़े तो 10 शुगर मिल स्थापित हो सकती है। इंडस्ट्री की जरूरत पानी होती है। बरगी बांध की क्षमता में वृद्धि के लिए अपर नर्मदा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा। जबलपुर में कोई भी निवेशक आता है उसे सिंगल विंडो के जरिए शासन की सारी सहूलियत दी जाएंगी।
उन्नत जिला
कृषि के उत्पादन में प्रदेश के उन्नत जिलों में शामिल है। यहां पर हरा मटर, सिंघाड़ा और उच्च किस्म की धान की खोती व्यापक पैमाने पर होती है। इसका उत्पादन भी जबर्दस्त है। लेकिन किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि इनके प्रसस्करण के लिए औद्योगिक इकाइयां नहीं हैं।
लौह अयस्क में अव्वल
लौह अयस्क के मामले में जबलपुर प्रदेशभर में अव्वल रहा है। सिहोरा के हरगढ़ में खनिज एवं खनिज आधारित उद्योगों के लिए एसईजेड की स्थापना हुई थी। आसपास कई प्रकार के खनिज बहुतायत हैं। लेकिन बड़ा निवेश नहीं आने से इसे सरकार ने डीनोटिफाइड कर दिया। अभी औद्योगिक क्षेत्र में करीब आधा दर्जन इकाइयां है।
सस्ता श्रम
उद्योगपतियो के लिए लाभ वाली बात यह है कि यहां पर सस्ता श्रम आसानी से उपलब्ध है। औद्योगिक अशांति नहीं है। आईटीआई, टे्रंड अप्रेंटिस, इंजीनियरिंग कॉलेज और पॅालिटेक्निक कॉलेज जैसे तकनीकी संस्थानों से हर साल सैकड़ों की तादाद में प्रशिक्षण प्राप्त युवा निकलते हैं।
सुरक्षित जमीन
जिले और आसपास के क्षेत्रों में बड़ा लैंड बैंक है। यदि उमरिया-डुंगरिया, हरगढ़, मनेरी की बात करें तो यहां करीब 1125 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि है। इसमें कुछ को विकसित किया जा चुका है। आवंटन की बात की जाए तो करीब 166 हेक्टेयर भूमि है जिसे निवेशकों को दिया जा चुका है। बड़ा भाग खाली है।

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