सावधानी दिखी, बीमारी घटी, यहां कम हो रहे संक्रमित

जबलपुर में भी त्योहार के सीजन को विशेषज्ञ मान रहे चुनौत

 

By: shyam bihari

Published: 16 Oct 2020, 09:54 PM IST

 

जबलपुर। बीते महीने कहर बरपा रहे कोरोना ने जबलपुर शहर में कुछ राहत दी है। अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ कोरोना संक्रमित मरीज कम हुए हैं। महीने के पहले पखवाड़े में हर दिन नए कोरोना पॉजिटिव का ग्राफ नीचे आया है। आम लोगों की जागरुकता और संयम से संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाया गया है। लेकिन कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में त्योहार शुरू हो रहे हैं। इस दौरान संक्रमण को काबू में रखने की चुनौती है। त्योहारी सीजन में लोग समझदारी, सावधानी के साथ सुरक्षा बरतते रहे तो सेकेड पीक के सम्भावित खतरे के दौरान नुकसान कम होगा। प्रशासन की सख्ती, स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी और लोगों ने संयम बनाए रखा तो शहर कोरोना को मात देने में कामयाब रहेगा।

कोरोना के लिहाज से अक्टूबर माह का पहला पखवाड़ा राहत भरा रहा। सितंबर माह में कोरोना पीक पर था। महीने में हर तीसरे दिन दो सौ से ज्यादा नए कोरोना पॉजिटिव मिल रहे थे। एक दिन में ढाई सौ से ज्यादा कोविड-19 पॉजिटिव केस का रेकॉर्ड बना था। इस लिहाज से अक्टूबर के पहले पखवाड़े में कोरोना के नए केस लगातार कम हुए। 1 अक्टूबर को 172 नए पॉजिटिव केस थे। यह प्रतिदिन घटते गए। 14 अक्टूबर को सिर्फ 69 नए कोविड मरीज मिलें। इस महीने कोरोना से मौत के औसत में भी गिरावट आयीं है। महीने की शुरुआत में एक्टिव केस 1235 थे। यह पहले पखवाड़े की समाप्त होने तक 869 शेष रह गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना संक्रमण के नए केस में देश में ओवरऑल कमी आ रही है। यह कोविड वायरस का अपना सामान्य व्यवहार है। जिन देशों में कोरोना संक्रमण के मामले पहले मिलें हैं, उनमें यह देखा गया है कि फस्र्ट पीक के तीन महीने के बाद दूसरी लहर आई है। इसमें फस्र्ट पीक के अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसान हुआ है। शहर में सितंबर माह में कोरोना का फस्र्ट पीक माना जा रहा है। इस लिहाज से तीन महीने बाद दिसंबर और जनवरी माह में सेकेंड पीक अनुमानित है। इस दौरान ठंड का पीक होने का अनुमान है। सामान्य रुप से ठंड रेस्पिरेटरी सिस्टम में ज्यादा सावधानी मांगता है। यह मौसम संक्रमण के प्रसार के लिए भी अनुकूल होता है। कोरोना से बचाव में त्योहारी सीजन में लापरवाही या ढिलाई हुई तो उसका नतीजा दिसंबर-जनवरी में खतरनाक हो सकता है।

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shyam bihari Desk
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