देश में एंग्लो इंडियन कोटे का दुरुपयोग, हाईकोर्ट ने दिया ये अहम निर्देश

एंग्लो इंडियन का विधायक पद पर मनोनयन क्यों, केन्द्र सरकार को बनाया पक्षकार

By: Premshankar Tiwari

Updated: 18 Dec 2018, 08:29 PM IST

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में एंग्लो इंडियन कोटे से लोकसभा व विधानसभा सदस्य मनोतीत किए जाने के प्रावधान को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस विजय शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में दायर की गई जनहित याचिका के पक्षकारों की सूची से प्रदेश के मुख्य सचिव, राज्यपाल के सचिव और राज्य के विधि मंत्रालय के निजी सचिव का नाम विलोपित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि केवल केंद्र सरकार को ही मामले में पक्षकार बनाया जाए।

यह है मामला
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ने यह जनहित याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 331, 333, 366(2) के अंतर्गत लोकसभा में दो व राज्य विधानसभाओं में एक-एक सदस्य एंग्लो इंडियन कोटे से मनोनीत करने का प्रावधान है। संविधान लागू करते समय यह प्रावधान 10 साल के लिए किया गया था। लेकिन इसे 10-10 साल बढ़ाया जा रहा है। 95 वें संविधान संशोधन के जरिए इस प्रावधान को 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। एंग्लो इंडियन समुदाय के मनोनीत सांसदों, विधायकों के अधिकार निर्वाचित सांसद व विधायकों के समान होते हैं। आग्रह किया गया कि अब एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्यों की संख्या नगण्य रह गई है, लिहाजा यह प्रावधान खत्म किया जाए।

राजनीतिक दल कर रहे दुरुपयोग
अधिवक्ता अजय रायजादा ने तर्क दिया कि एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्य बिना चुनाव लड़े सांसद, विधायकों के अधिकारों का फायदा उठा रहे हैं। इससे अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए समानता के अधिकार का हनन हो रहा है। राजनीतिक दल इस प्रावधान का अल्पमत को बहुमत में बदलने के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत परीक्षण के दौरान एंग्लो इंडियन कोटे से विधायक मनोनीत करने पर रोक लगा दी थी। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीन पक्षकारों के नाम विलोपित करने का निर्देश दिया।

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Premshankar Tiwari Desk
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