वीडियो स्टोरी: बड़ा कर्ज माफी घोटाला...शातिर बैंक कर्मियों ने किसानों के नाम पर करोड़ों रुपए निकाले

कर्ज माफी घोटाला... शातिर बैंक कर्मियों ने किसानों के नाम पर करोड़ों रुपए निकाले

By: Premshankar Tiwari

Updated: 19 Jan 2019, 04:03 PM IST

Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

राघवेन्द्र चतुर्वेदी@चकटनी। व्यापमं घोटाला और उपज खरीदी घोटाला के बाद कटनी जिले में एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में बैंक अधिकारी और कर्मचारियों ने किसानों के नाम पर खुद कर्ज निकाल लिया। कुछ को डिफाल्टर भी घोषित कर दिया। संबंधित किसान को डिफाल्टर घोषित करके उसके नाम की रकम खुद हड़प ली। खास बात यह है कि प्रदेश की नई सरकार द्वारा कर्जमाफी की घोषणा के बाद शातिर बैंक कर्मियों की बांछें खिल गईं। किसानों का कर्ज माफ होने की वजह से उन्हें सीधा-सीधा फायदा मिल गया, जबकि किसान लोन और इस पूरे घटनाक्रम से ही अनजान हैं।

ऐसे खुला राज
जानकार सूत्रों के अनुसार जिला सरकारी बैंक से गैतरा गांव निवासी किसान चंद्रभान के नाम से 3 लाख 67 हजार 894 रुपए, चंद्रिका के नाम पर 53347 रुपए और जरवाही निवासी गोविंद के नाम से 65 हजार रुपए जमा करने का नोटिस गांव में पहुंचा। नोटिस को देखते ही ये किसान आश्चर्य पड़ गए। कारण ये था कि उन्होंने बैंक से कभी कर्ज लिया ही नहीं। यह बात आसपास के गांवों तक फैल गई। किसानों ने पड़ताल की तो पता चला कि गैतरा और जरवाही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के किसानों के नाम पर करोड़ों रुपए सहकारी बैंक से निकाल लिए गए हैं। कई किसानों को डिफाल्टर तक घोषित कर दिया है। इनमें ज्यादातर वे किसान शामिल हैं, जिन्होंने आज तक बैंक से कभी कर्ज लिया ही नहीं। खाद-बीज आदि के नाम पर जमा होने वाली उनकी ऋण पुस्तिका की आड़ में सहकारी बैंक के शातिर अधिकारी-कर्मचारियों ने यह घोटाला कर दिया।

जो दुनिया में नहीं उसके नाम पर भी कर्ज
मामले के खुलासे के बाद शनिवार को गैतरा व जरवाही गांव के कुछ लोग अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि गैतरा गांव के किसान भूखन लाल के नाम पर 95 हजार रुपए कर्ज लिया गया है, जबकि भूखन की 7 साल पहले ही मौत हो चुकी है। इसी तरह राम भरोस यादव के नाम पर 1 लाख 39 हजार कर्ज चढ़ा दिया गया है, जबकि उसके क्रेडिट कार्ड में पहले से 28 हजार रुपए अतिरिक्त जमा किए गए हैं। मात्र गैतरा और जरवाही गांव में ही किसानों के नाम पर लिए गए कर्ज की यह रकम 60 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है। अन्य गांवों को मिलाकर मामला करोड़ों-अरबों में पहुंच सकता है।

घोटाले के पीछे हुआ ये बड़ा खेल
जानकार सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर किसान जिला सहकारी बैंक और उनकी समितियों से खाद-बीज लेते हैं। उस समय उनके ऋण पुस्तिका यानी बही या उसकी फोटो कापी जमा कराई जाती है। शातिर दिमाग अधिकारियों ने इन्हीं ऋण पुस्तिकाओं को आधार बनाकर बड़ा घोटाला कर लिया। प्रदेश में यह अरबों रुपए तक पहुंच सकता है। जानकारों के अनुसार सहकारी बैंक के अधिकारी-कर्मचारियों ने बिना किसान को जानकारी दिए उसकी बही पर लोन ले लिया। समय सीमा के बाद उसे डिफाल्टर घोषित करके उसका खाता भी बंद कर दिया, ताकि मामला वहीं दबकर रह जाए। उल्लेखनीय है कि इस बार प्रदेश सरकार ने किसानों का ऋण माफ करने की घोषणा कर दी है। इस खुशी में सहकारी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारियों के चेहरे और अधिक खिल गए हैं। कारण ये है कि उनके द्वारा किसानों के नाम पर निकाला गया लोन माफ हो जाएगा और बात जहां की तहां खत्म हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाए तो व्यापमं और अनाज खरीदी घोटाले की तर्ज पर यह बड़ा घोटाला भी पूर्व सरकार की गले की फांस बन सकता है।

प्रकरण की होगी जांच
किसानों के नाम पर ऋण लिए जाने का मामला काफी गंभीर है। यह धोखाधड़ी की भी श्रेणी में आता है। किसानों की शिकायत के आधार पर इसकी बारीकी से जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी तथ्य सामने आएंगे। उसके आधार पर दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

केवीएस चौधरी, कलेक्टर, कटनी

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