एचपीवी इन्फेक्शन बढ़ा रहा महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर

Big research; कॉलेज और आइसीएमआर की रिसर्च में सामने आया सर्वाइकल कैंसर पीडि़त 65.5 प्रतिशत महिलाएं एचपीवी संक्रमित

By: govind thakre

Updated: 18 Nov 2019, 07:31 PM IST

जबलपुर. कार्सिनोमा टिश्यू का टेस्ट मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में पिछले एक वर्ष में सर्वाइकल कैंसर से पीडि़त महिलाओं पर रिसर्च की गई। इसमें शहर सहित आसपास के करीब 10 जिलों की महिला सर्वाइकल कैंसर पीडि़त शामिल है। इसके नतीजे चौकाने वाले हैं.
सेंट्रल इंडिया की युवतियों और महिलाओं को दो प्रकार के हृयूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) से सर्वाइकल कैंसर का खतरा है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (एनएससीबीएमसी) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की रिसर्च में सर्वाइकल कैंसर से पीडि़त 65.5 प्रतिशत महिलाएं एचपीवी इन्फेक्शन की शिकार मिली हैं। इसमें ज्यादातर एचपीवी-16 और 18 की पीडि़त है। एचपीवी कई वायरस का समूह होता है। ये गर्भाशय ग्रीवा को संक्रमित करता है। सौ से ज्यादा प्रकार के एचपीवी होते हैं। मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग और आइसीएमआर के शोध में दो प्रकार के एचपीवी वायरस से ही ज्यादातर महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होने की जानकारी सामने आयी है। यह संक्रमण शारीरिक संबंध बनाने से एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. श्यामजी रावत की निगरानी में पीडि़ताओं के बायोप्सी सेंपल लिए गए। इन नमूनों की आइसीएमआर में वैज्ञानिक डॉ. पीवी बर्डे की निगरानी में मॉलिक्यूलर जांच हुई। कार्सिनोमा टिश्यू का परीक्षण हुआ। कैंसर पीडि़त महिलाओं में एचपीवी-16 और 18 के इन्फेक्शन का पता लगाया गया। रिसर्च टीम में सुलेखा यादव, प्रांजिल मंडलोई, चिंकल पानिहर शामिल थे। रिसर्च रिपोर्ट - 87 सर्वाइकल कैंसर पीडि़त की जांच हुई। - 65.5 प्रतिशत एचपीवी के संक्रमण से पीडि़त। - 51.7 प्रतिशत एचपीवी-16 से संक्रमित। - 27 प्रतिशत एचीपी-18 से संक्रमित मिली। - 17.2 प्रतिशत एचपीवी-16 व 18 संक्रमित। शादी से पहले वैक्सीनेशन कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार सेंट्रल इंडिया में एचपीवी संक्रमण की एक बड़ी वजह अशिक्षा और जागरुकता में कमी है। विदेशों में संक्रमण को रोकने के लिए युवतियों और महिलाओं का समय रहते वैक्सीनेशन किया जाता है। देश में एचपीवी इन्फेक्शन रोकने वैक्सीन उपलब्ध है। लेकिन ये सरकार के वैक्सीनेशन प्रोग्राम का हिस्सा नहीं है। महिलाएं वैक्सीन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखती है। यदि हमारे यहां शादी (शारीरिक संबंध) से पहले महिला में एचपीवी इन्फेक्शन का वैक्सीनेशन किया जाए तो सर्वाइकल कैंसर के संक्रमण को नियंत्रित जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर का अगर शुरुआती समय में ही उपचार किया जाए तो इसके खतरे को कम करके, इसके कारण होने वाली मौतों को भी कम किया जा सकता है।
अहम बातें - दुनिया में कैंसर के कारण होने वाली मौतों में सर्वाइकल कैंसर एक प्रमुख कारण है। - देश में कैंसर से होने वाली मौत में दूसरा सर्वाधिक सर्वाइकल कैंसर है। - शोध से अंचल में एचपीवी-16 और 18 इन्फेक्शन से सर्वाइकल कैंसर की बात सामने आयी। - मध्य भारत क्षेत्र में कैंसर के स्पेसिफिक संक्रमण को लेकर पहली बार परीक्षण। - प्रारंभिक नतीजे चौंकाने वाले। विशेषज्ञों ने संक्रमण को लेकर व्यापक शोध की जरूरत बताई। - एक कैंसर मरीज पर सरकार जितनी राशि उपचार में खर्च करती है। उतने में एक गांव का वेक्सीनेशन हो सकता है। वायरस और इन्फेक्शन पर शोध मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में विशेषज्ञ डॉ. श्यामजी रावत के अनुसार सर्वाइकल कैंसर से पीडि़त महिलाओं पर आइसीएमआर के सहयोग से इन्फेक्शन पर रिसर्च की गई है। इसमें 65.5 महिलाओं में एचपीवी इन्फेक्शन मिला है। ज्यादातर महिलाएं दो प्रकार के एचपीवी(16 व 18) से संक्रमित है। वेक्सीनेशन के जरिए एचपीवी संक्रमण के खतरे और सर्वाइकल कैंसर को कम किया जा सकता है।

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govind thakre Editorial Incharge
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