राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में बड़ा घोटाला, मचा हड़कंप

राज्य सरकार ने रिटायरमेंट से ठीक पहले किया इंजीनियर का डिमोशन

By: Premshankar Tiwari

Published: 10 Mar 2018, 11:23 AM IST

जबलपुर। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में लंबे समय से आ रही घोटाले की बू के बाद राज्य सरकार ने शुक्रवार बड़ी कार्रवाई की। लाखों रुपए के घोटाले में आरोपित पाए गए एक अधीक्षण अभियंता (एसई) को आरके शर्मा को पदावनत कर कार्यपालन (डीई) अभियंता बना दिया गया। शर्मा की नौकरी महज आठ महीने ही बची है। ऐसे उदाहरण विरले ही मिलते है जब किसी अधिकारी पर रिटायरमेंट से ठीक पहले ऐसी गाज गिरी हो। सेवानिवृत्ति से चंद माह पहले की गई इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।

बिना काम के किया भुगतान
शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में ठेका एजेंसी को गलत तरीके से 52 लाख रुपए का भुगतान किया। सूत्रों के अनुसार ठेका कंपनी ने बिना कार्य के ही शर्मा से मिलीभगत करके यह राशि आहरित कर ली। जांच में दोषी पाए जाने के शर्मा का डिमोशन किया गया है। कार्रवाई के बाद अब उन्हें डीई का प्रारम्भिक वेतन मिलेगा। वहीं सेवानिवृत्ति तक वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ से भी वंचित रहेंगे। जानकारी के अनुसार कम्पनी प्रबंधन की ओर से मुख्य महाप्रबंधक एबी सिंह द्वारा सात मार्च को उक्त आदेश जारी किया गया। शर्मा इसी वर्ष 30 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं।

ये था प्रकरण
आरके शर्मा वर्ष 2012 से 2016 तक अधीक्षण अभियंता संचालन एवं संधारण वृत्त टीकमगढ़ में पदस्थ थे। इसके साथ ही वे टीकमगढ़ के अंतर्गत राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के 11वें प्लान के कार्यों का मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी थे। योजना के कार्यों के लिए कम्पनी द्वारा मुम्बई की मेसर्स रोहणी इलेक्ट्रिकल्स को ठेका दिया गया था। इस कम्पनी को वर्ष 2009 में ठेका दिया गया था। शर्मा ने नोडल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत बिलों में प्रदर्शित कार्यों को बिना भौतिक सत्यापन किए 52 लाख के दो बिल पास कर दिया। बिल में एेसे उपकरणों की भी राशि दर्शायी गई थी, जो ठेका अनुबंध में ही शामिल नहीं था।

जांच में पुष्टि, फिर कार्रवाई

आरोप-एक
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत नौ ग्रामों के मजरों-टोलों के कार्यों में छह ग्रामों के १६ मजरों-टोलों का कार्य अपूर्ण था। फिर भी ठेका एजेंसी रोहणी को 30.49 लाख का भुगतान अधिक कर दिया गया। यहीं नहीं कनिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाकर बिल प्रस्तुत कराया गया था।

आरोप-दो
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण येाजना में स्थापित 103 में 91 खराब हुए और 12 उपभोक्ताओं के विरूद्ध बकाया राशि वाले फेल ट्रांसफार्मरों को गारंटी अवधि में बदला जाना था। 103 में सिर्फ 20 की कीमत 10.97 लाख की कटौती ठेका एजेंसी से की गई। 83 के एवज में 21.58 लाख रुपए नहीं वसूला गया। खराब ट्रांसफार्मरों को कम्पनी के खर्च से बदलना पड़ा था।

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Premshankar Tiwari Desk
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