मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में रिजल्ट घोटाला, एक प्राइवेट कॉलेज के छात्रों को पहुंचाया फायदा

विवि की जांच में पाया गया कि गोपनीयता भंग हुई है, रिजल्ट कमेटी की स्वीकृति के बिना चुनिंदा छात्रों के नतीजे किए घोषित किया गया है

जबलपुर. मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में रिजल्ट घोटाला उजागर हुआ है। एक निजी कॉलेज के चुनिंदा बीयूएमएस छात्र-छात्राओं के नतीजे रिजल्ट कमेटी की स्वीकृति के बिना घोषित कर दिए गए। दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थियों की शिकायत के बाद चार सदस्यीय समिति ने मामले की जांच की। कुलसचिव डॉ. संजय तोतड़े की अध्यक्षता वाली समिति ने जांच रिपोर्ट कुलपति डॉ. टीएन दुबे को सौंप दी है। समिति ने जांच में पाया कि बीयूएमएस के परीक्षा परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। नियम विरुद्ध तरीके से बुरहानपुर के एक कॉलेज के विद्यार्थियों के नतीजे जारी करने से गोपनीयता भंग हुई है।

ये है मामला

विवि की वर्ष 2018 की बीयूएमएस सेकंड और थर्ड इयर की पूरक परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्र-छात्राओं ने एक साथ आवेदन किए थे। छात्रों का आरोप है कि पुनर्मूल्यांकन परिणाम की जानकारी लेने के लिए पिछले महीने बुरहानपुर के निजी यूनानी कॉलेज के प्राचार्य विवि पहुंचे। उन्होंने तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक डॉ. अजय मिश्रा से परिणामों की जानकारी मांगी तो उन्होंने रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी से पूछा। कम्पनी ने संबंधित पुनर्मूल्यांकन के परिणाम की टेबुलेशन शीट अधिकारी को दिखाई। उसकी एक छायाप्रति प्राचार्य को दे दी। अगले दिन प्राचार्य ने कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर रिजल्ट चस्पा कर दिया। शेष छात्रों के नतीजों की जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने हंगामा किया, तब रिजल्ट कमेटी की स्वीकृति के बिना परिणाम घोषित करने की जानकारी सामने आई।

ये है स्थिति

04 यूनानी कॉलेज, भोपाल (सरकारी), बुराहनपुर, देवास, इंदौर में संचालित

100 से ज्यादा विद्यार्थियों ने बीयूएमएस में पुनर्मूल्यांकन के लिए किया था आवेदन
01 कॉलेज के ही सात छात्रों के रिजल्ट आउट हुए, इसमें सिर्फ पास वाले छात्र थे

11 विद्यार्थी कॉलेज से परीक्षा में शामिल हुए थे, फेल छात्रों के रिजल्ट चस्पा नहीं किए

इसलिए है गबड़बडी की आशंका

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में अनुत्तीर्ण होने वाले किसी छात्र का रिजल्ट जारी नहीं होने गड़बड़ी की बू आ रही है। सूत्रों के अनुसार समिति को जांच में पता चला कि सिर्फ एक ही कॉलेज के पास होने वाले विद्यार्थियों के ही नतीजे जारी किए गए हैं। पुनर्मूल्यांकन का आवेदन करने वाले शेष विद्यार्थियों की टेबुलेशन शीट विवि से जारी नहीं हुई। इससे रिजल्ट में हेराफेरी के आरोपों को बल मिल रहा है। मामले में तत्कालीन परीक्षा प्रभारी की भूमिका संदिग्ध हो गई है। उनके विरुद्ध कार्रवाई का शिकंजा कस सकता है। हालांकि प्रभारी डॉ. मिश्रा ने मामले में रिजल्ट तैयार करने वाली कम्पनी के कर्मचारियों की लापरवाही बताई है। कुलपति दुबे के अनुसार जांच रिपोर्ट मिल गई है। दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

deepankar roy Reporting
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