career mantra: मनचाही मंजिल की चाबी है लॉ, एक्सपर्ट ने बताए ये खास राज, देखें वीडियो

लॉ फील्ड में है कमाल का स्कोप, अंतिम छोर पर भी पक्का है रोजगार

जबलपुर। बारहवीं कक्षा पास करने के बाद हर छात्र का मन एक बार भ्रम के दोराहे पर आ खड़ा होता है। छात्र और उनके परिजनों के मन में भी बस यही सवाल आता है कि उच्च शिक्षा में कौन सी राह पकड़ी जाए, जहां रोजगार की संभावनाएं अधिक हों..? बारहवीं के रिजल्ट के बाद अब वह मौका बस आने ही वाला है, जब फिर से ये सवाल हर मन में खड़े होंगे। कैरियर के लिए छात्र अपने-अपने हिसाब से राह चुनेंगे। कोई इंजीनियरिंग, कोई मेडिकल, तो एग्रीकल्चर या अन्य संकाय को लक्ष्य बनाकर आगे के सफर पर निकलेगा। पत्रिका ने लॉ के क्षेत्र में महारत हासिल प्राध्यापकों से बात की तो एक और नया राज खुला.., वह यह कि लॉ फील्ड में भी गजब का स्कोप है। रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय लॉ फैकल्टी की डीन डॉ. दिव्या चंसौरिया की मानें तो लॉ एक तरह से मनचाही मंजिल की चाबी है। इसको अपनाकर विद्यार्थी अपना भविष्य बेहतर दिशा में सुरक्षित कर सकते हैं।


पहला अधिकार है लॉ
रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय लॉ फैकल्टी की डीन डॉ. दिव्या चंसौरिया का मानना है कि लॉ की जानकारी हर व्यक्ति का पहला अधिकार है। इससे उसे अपने अधिकारों की जानकारी के साथ कत्र्तव्यों और दायित्व का भी बोध होता है। देश का संविधान और कानून कैसा है? इसमें नागरिकों को क्या-क्या अधिकार दिए गए हैं? न्याय व्यवस्था आखिर क्या है? प्रजातंत्र में विधायिका और कार्यपालिका की जनता के प्रति आखिर क्या जवाबदेही है..? इसकी बेहतर और पर्याप्त जानकारी लॉ ही देता है। डॉ. श्रीमती चंसौरिया की इस बात पर सहमति जताते हुए खालसा लॉ कॉलेज की प्राचार्य डॉ. नीना प्यासी ने भी कहा कि लॉ की पढ़ाई को स्कूली शिक्षा में ही शामिल किया जाना चाहिए।

एक साथ दो डिग्री
डीन डॉ. श्रीमती चंसौरिया और डॉ. श्रीमती प्यासी ने बताया कि लॉ को १२ वीं के बाद और ग्रेजुएशन के बाद भी किया जा सकता है। यदि बारहवीं के बाद बीए एलएलबी (आनर्स) को चुनते हैं तो इसमें विद्यार्थियों को एक साल की बचत हो जाती है। तीन साल ग्रेजुएशन करने के बाद एलएलबी करने में फिर तीन साल लगते हैं, जबकि बीए एलएलबी लगभग पांच साल में कम्लीट हो जाता है। एक और खास बात यह है कि इसमें एक साथ दो डिग्रियां मिल जाती हैं। एक तो बीए की और दूसरी लॉ ग्रेज्युएट की। यह विशेषता किसी अन्य पाठ्यक्रम में नहीं है। इसमें कांस्टीट्यूशन लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, ह्यूमन राइट्स और क्रिमनल लॉ जैसे अहम विषयों की जानकारी मिलती है। बीएएलएलबी में करीब ५६ सब्जेक्ट्स होते हैं, जो कानून की जानकारी के साथ व्यवहारिक ज्ञान भी देते हैं। न्यायपालिका के विद्वान जज और वरिष्ठ अधिवक्ता गण छात्रों से रूबरू होकर उन्हें व्यवहारिक ज्ञान देते हैं।


ये हैं खास फायदे
डीन डॉ. श्रीमती चंसौरिया के अनुसार लॉ ग्रेज्युट और पोस्ट ग्रेज्युएट के लिए कैरियर की राह हर तरफ खुली हुई है। लॉ में टीचर्स की कमी है। जजेस के कई पद रिक्त हैं। छात्र एलएलएम और पीएचडी करके एजुकेशन की फील्ड में जा सकते हैं। देश हो या विदेश कहीं भी रहकर वकालत कर सकते हैं। कारपोरेट सैक्टर के तो पूरे दरवाजे ही इसके लिए खुले हुए हैं। सबसे अहम बात है कि सर्वोच्च मानी जाने वाली न्यायपालिका में जज जैसे बड़े पद को प्राप्त कर सकते हैं। निजी प्रेक्टिस के माध्यम से भी आय अर्जित कर सकते हैं। एक बात यह भी है कि इस डिग्री के बाद आप यूपीएसससी, एमपीपीएससी जैसे अन्य काम्पटीटिव एक्जाम्स के जरिए अपना कैरियर संवार सकते हैं। एमपी हाईकोर्ट होने के साथ जबलपुर में लॉ यूनिवर्सिटी की घोषणा के बाद यहां स्कोप और बढ़ गया है। यूं कहें कि कैरियर के कई दरवाजे आपके लिए खुले हुए हैं। बस संकल्प और लगन हो तो आप अपने भविष्य को स्वर्णिम बना सकते हैं।

कैसे करें आवेदन
डीन डॉ. श्रीमती चंसौरिया ने बताया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में लॉ डिपार्टमेंट में ८० सीटें हैं। पहले इसके लिए एंट्रेंस एग्जाम होते थे, लेकिन इस बार से यहां छात्रों का चयन मैरिट बेस पर होगा। जबलपुर संभाग में करीब १३ लॉ कॉलेज हैं, जो यूनिवर्सिटी से संबद्ध हैं। मैरिट सूची में चयन के जरिए ही इनमें प्रवेश पाया जा सकता है। वैसे क्लैट एग्जाम के माध्यम से छात्र शहर ही नहीं देश की किसी भी लॉ यूनिवर्सिटी में जा सकते हैं। रादुविवि में चयन और एडमिशन की जानकारी ऑनलाइन है। इसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। बीएएलएलबी में प्राय: एडमिशन की प्रक्रिया मई या जून के प्रथम सप्ताह में ही प्रारंभ होती है।

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Premshankar Tiwari Desk
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